SIR: चुनावी राज्यों में घमासान का दौर जारी है, और इसकी मुख्य वजह मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान है। इसी बीच, संसद के शीतकालीन सत्र की शुरुआत भी हो गई है। विपक्ष लगातार सरकार से एसआईआर पर चर्चा करने की मांग कर रहा है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक के सांसद गंभीरता से एसआईआर पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन में जारी राजनीतिक संग्राम के बीच कहा है कि उन्हें सरकार की मंशा पर संदेह है।
कांग्रेस अध्यक्ष बताते हैं कि विपक्ष एसआईआर पर जल्द से जल्द बहस शुरू करना चाहता है, लेकिन हमें संदेह है कि सरकार इसे टालकर अपनी अन्य कार्यवाहियों को पूरा करना चाहती है। विपक्ष की इस मांग के चलते शीतकालीन सत्र में हंगामे की संभावना बढ़ रही है। सवाल यह है कि क्या पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा? चलिए इस सवाल का जवाब देते हुए ताज़ा समीकरण पर चर्चा करते हैं।
सदन में SIR पर चर्चा को लेकर विपक्ष का सख्त रुख!
संसद शीतकालीन सत्र का दौर जारी है, और इस बीच लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक एसआईआर का मुद्दा गरमाता जा रहा है। विपक्ष लगातार एसआईआर पर चर्चा की मांग के लिए प्रदर्शन कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम मोदी के बयानों पर निशाना साधते हुए कहा है कि वह बात को घुमा रहे हैं। यूपी से बंगाल, केरल, तमिलनाडु तक एसआईआर पर शुरू हुई राजनीतिक जंग के बीच विपक्ष लोकसभा और राज्यसभा में इस मुद्दे पर त्वरित चर्चा की मांग कर रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार एसआईआर पर बहस को टालकर अपनी अन्य कार्रवाइयों को निपटाना चाहती है। खबर है कि 12 से अधिक विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू से मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा करने की मांग रखी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सख्त रुख अपनाने वाले विपक्ष के हाथों क्या आता है।
क्या सदन में हंगामे की लहर बढ़ेगी?
मकर द्वार से लेकर सदन के भीतर तक एसआईआर को लेकर नारेबाजी हो रही है। स्थिति यह है कि सोमवार से शुरू हुए संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के स्थगन की खबरें आ चुकी हैं। पिछले कुछ संसद सत्र पर गौर करें तो स्पष्ट होता है कि कार्यवाही का अधिकांश समय हंगामे की भेंट चढ़ जाता है। यही कारण है कि वर्ष 2025 के शीतकालीन सत्र में भी इसी तरह की संभावना जताई जा रही है।
कयास यह लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष अपनी मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन की आवाज तेज कर सकता है। इससे लोकसभा से लेकर राज्यसभा तक टीएमसी, राजद, सपा, कांग्रेस, डीएमके, बसपा और अन्य कुछ पार्टियाँ अपनी आवाज उठा सकती हैं। यही वजह है कि शीतकालीन सत्र के हंगामेदार होने की आशंका जताई जा रही है। हालाँकि, अभी ध्यान सरकार के रुख पर है, और देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनौती से कैसे निपटा जाता है।



