वंदे मातरम: शीतकालीन सत्र के दौरान सदन के गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं। स्थिति ये है कि बीजेपी और कांग्रेस के बीच तर्कों ने हलचल को बढ़ा दिया है। पीएम मोदी दोपहर 12 बजे वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर 10 घंटे की चर्चा की शुरुआत करेंगे। यह चर्चा खास है क्योंकि मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने पहले ही वंदे मातरम की अनिवार्यता का विरोध किया है।
खबर है कि बीजेपी-कांग्रेस अपने-अपने तर्कों के साथ बहस को गति देंगे। इस चर्चा में लोकसभा में पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, कांग्रेस नेता गौरव गोगोई और प्रियंका गांधी वाड्रा भी शामिल होंगे। इसी क्रम में सबकी निगाहें आज की कार्यवाही पर हैं।
बीजेपी-कांग्रेस के तर्कों के साथ सदन में गूंजेगी Vande Mataram पर चर्चा!
लोकसभा में आज की कार्यवाही पर सबकी नजरें टिकी हैं। दरअसल, आज पीएम मोदी लोकसभा में 12 बजे से वंदे मातरम पर चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस दौरान सदन में राष्ट्रीय गीत पर होने वाली चर्चा की आवाज गूंजेगी। बीजेपी का तर्क है कि वंदे मातरम पर 1937 का निर्णय गलत और झुकने वाला था।
वहीं कांग्रेस सत्तारुढ़ दल बीजेपी पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगाते हुए खुद को राष्ट्रीय गीत को दर्जा देने वाली पहली पार्टी बताती है, और 1937 के निर्णय को समावेशिता के लिए उचित ठहराती है। इन्हीं तर्कों की भिन्नता के कारण आज सदन में गहमा-गहमी का माहौल रहने की संभावना है।
राष्ट्रीय गीत पर मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के विरोधी सुर!
देश के विभिन्न हिस्सों में वंदे मातरम को लेकर विभिन्न चर्चाएं चल रही हैं। 7 नवंबर, 2025 को राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ पर मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से विरोध के सुर गूंजे थे। संगठन के प्रमुख मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि वंदे मातरम के पहले दो पद ऐतिहासिक रूप से स्वीकार्य हैं, लेकिन बाकी पद इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल नहीं हैं।
मौलाना मदनी का तर्क है कि राष्ट्रीय गीत के बाकी पदों में माता को देवी दुर्गा के रूप में पुकारा गया है, जिसे इस्लाम स्वीकार नहीं करता। इसी वजह से जमीयत उलेमा-ए-हिंद देश के विभिन्न हिस्सों में वंदे मातरम की अनिवार्यता पर विरोध कर रहा है। इसी विरोध के बीच सदन में राष्ट्रीय गीत पर होने वाली चर्चा पर सभी की नजरें लगी हैं।



