Nitish Kumar: पटना के गांधी मैदान में हाल ही में हुए ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह के बाद, बिहार की नई सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में लगी हुई है। नए मंत्रिमंडल में कुल 26 मंत्रियों ने शपथ ली है, जिसमें बीजेपी का दबदबा स्पष्ट है। सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, मंगल पांडे के साथ बीजेपी के 14 विधायक नीतीश कुमार की कैबिनेट का हिस्सा बने हैं। वहीं, जेडीयू से 85 विधायकों में से 8 मंत्री और नीतीश कुमार ही सीएम बने हैं।
चिराग पासवान की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, जिनके खेमे से 19 विधायकों में से दो को मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। इस नए समीकरण पर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या चिराग पासवान के जरिए जेडीयू को न्यूट्रल करने का प्रयास किया जा सकता है? क्या नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला नया मंत्रिमंडल असंतोष का सामना करेगा? फिलहाल, एनडीए एकजुट है और ऐसा होने की संभावना न के बराबर है। लेकिन फिर भी, कुछ सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब खोजे जाएंगे।
सीएम Nitish Kumar की कैबिनेट में बीजेपी का दबदबा!
बिहार की नई कैबिनेट में बीजेपी का स्पष्ट दबदबा दिखाई दे रहा है। 89 विधायकों वाली बीजेपी के 14 विधानसभा सदस्य मंत्री बने हैं। यह संख्या कुल मंत्रियों की 50 फीसदी से अधिक है। बीजेपी की तरफ से सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, दिलीप जायसवाल, मंगल पांडे, रामकृपाल यादव, नीतिन नवीन, संजय सिंह टाइगर, अरुण शंकर प्रसाद, सुरेंद्र मेहता, नारायण प्रसाद, रमा निषाद, लखेंद्र सिंह रौशन, श्रेयसी सिंह और प्रमोद कुमार ने मंत्री पद की शपथ ली है।
जेडीयू खेमे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ विजय चौधरी, बिजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, अशोक चौधरी, लेशी सिंह, मदन सहनी, सुनील कुमार और मोहम्मद जमा ख़ान ने भी शपथ ली है। चिराग पासवान कोटे से संजय कुमार और संजय कुमार सिंह मंत्री बने हैं। वहीं, हम और आरएलएम से क्रमश: संतोष सुमन और दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया है। मंत्रिमंडल का यह गठन साफ तौर पर एनडीए में सर्वाधिक सीट जीतने वाली बीजेपी के दबदबे को दर्शाता है।
क्या चिराग पासवान के सहारे जेडीयू को न्यूट्रल करने की कोशिश होगी?
नीतीश कुमार के लिए अगले पांच वर्षों तक सरकार चलाना काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। 85 विधायकों वाली जेडीयू में महत्वकांक्षा के बढ़ने के साथ असंतोष भी पनप सकता है। इस बार बीजेपी 89 विधायकों के साथ मजबूती में है, जिससे सामंजस्य स्थापित करना मुश्किल हो सकता है। बिहार में चिराग पासवान का बढ़ता कद भी नीतीश कुमार के लिए चुनौती पेश कर रहा है। चिराग पासवान, जो कभी नीतीश कुमार के कट्टर विरोधी रहे हैं, हाल ही में अपनी ही सरकार पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में यह भी कहा जा रहा है कि चिराग पासवान के माध्यम से जेडीयू को नई सरकार में न्यूट्रल रखने की कोशिश हो सकती है।
दरअसल, नई सरकार से जनता को कई उम्मीदें हैं। चाहे वह करोड़ों युवाओं को रोजगार देना हो, बिजली बिल माफ करना हो, जीविका दीदियों को सहायता प्रदान करना हो या अन्य वादे। नीतीश कुमार के लिए इन सभी वादों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण होगा। शराबबंदी के चलते पहले से ही राजस्व के मामलों में दबाव झेल रही बिहार सरकार के लिए ये वादे पूरा करना आसान नहीं होगा। इस पर दिलचस्पी रहेगी कि चिराग पासवान इस नई सरकार में क्या भूमिका निभाते हैं और नीतीश कुमार की कार्यशैली कैसी होती है।








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