नई दिल्ली/मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में पिछले कुछ सप्ताह से जारी विरोध-प्रदर्शन ने अब नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। महंगाई, बिजली संकट, प्रशासनिक नीतियों और राजनीतिक अधिकारों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब पाकिस्तान सरकार के खिलाफ व्यापक जनाक्रोश के रूप में सामने आ रहा है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के वरिष्ठ नेता सरदार अमन खान की ओर से भारत और जम्मू-कश्मीर के लोगों से समर्थन की अपील ने इस मुद्दे को नई चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो संदेश में सरदार अमन खान ने भारत और जम्मू-कश्मीर के लोगों से PoK के नागरिकों के साथ एकजुटता दिखाने की अपील की। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि सभी स्रोतों से नहीं हो सकी है, लेकिन इसके सामने आने के बाद इस मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान दोनों में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 5 जुलाई को पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में व्यापक बंद और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान प्रशासन शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई कर रहा है, बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया गया है और कई क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही तथा आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।
हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। दूसरी ओर पाकिस्तान प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कह रहा है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में JAAC के कोर सदस्य सरदार अमन खान ने श्रीनगर, जम्मू, लद्दाख, पुंछ और राजौरी के लोगों से PoK के नागरिकों के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन को दबाने के लिए कठोर कार्रवाई की जा रही है और आम नागरिकों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। वीडियो में उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों को अब अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर समर्थन की आवश्यकता है।
हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत आर्थिक मुद्दों से हुई थी। स्थानीय नागरिक लंबे समय से बढ़ती महंगाई, बिजली दरों में वृद्धि, खाद्यान्न की उपलब्धता, बेरोजगारी और प्रशासनिक फैसलों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।
समय के साथ यह आंदोलन केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक अधिकारों, स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही और शासन व्यवस्था से जुड़े सवाल भी इसमें शामिल हो गए।
विश्लेषकों का मानना है कि लगातार बढ़ती आर्थिक चुनौतियों और प्रशासनिक असंतोष ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाया है।

JAAC और अन्य स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कर रही हैं। कुछ कार्यकर्ताओं का दावा है कि कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है और कुछ लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सीमित है। पाकिस्तान सरकार ने विभिन्न मौकों पर कहा है कि सुरक्षा बल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई कर रहे हैं और किसी भी अवैध गतिविधि को रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सरदार अमन खान की भारत और जम्मू-कश्मीर के लोगों से समर्थन की अपील के बाद यह मुद्दा भारतीय मीडिया और सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि PoK में असंतोष लगातार बढ़ता है तो इसका प्रभाव भारत-पाकिस्तान संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। हालांकि इस विशेष अपील पर भारत सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को अपना अभिन्न हिस्सा मानता रहा है और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस संबंध में अपना रुख स्पष्ट करता रहा है।
JAAC ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। दूसरी ओर पाकिस्तान प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही है।
क्षेत्र में लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए आने वाले दिनों में हालात पर सभी की नजर बनी रहेगी। यदि आंदोलन और व्यापक होता है तो इसका असर न केवल पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की आंतरिक स्थिति पर बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।