लॉन्ग टर्म आउटपुट एंड परफॉर्मेंस बेस्ड रोड एसेट्स मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (OPRMC-Third) की निविदा शर्तों में कथित बदलाव और मीडिया में प्रकाशित खबरों के बाद बिहार पथ निर्माण विभाग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि निविदा प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी आवश्यकताओं और निर्धारित मानकों के अनुरूप की गई है।
बिटुमिनस कोल्ड मिक्स कार्य को भी माना गया मान्य अनुभव
विभाग की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि समान प्रकृति के बिटुमिनस कार्यों के अंतर्गत बिटुमिनस कोल्ड मिक्स कार्य भी मान्य माना जाता है। यदि किसी विशेष पैकेज में कोल्ड मिक्स तकनीक का उपयोग किया जाना है, तो संबंधित निविदा दस्तावेज में इसकी विशिष्ट अनुभव अर्हता को कंडिका 2.42 (बी) के तहत अलग से शामिल किया जाता है।
वन्यजीव क्षेत्रों में कोल्ड मिक्स तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य
विभाग के अनुसार, पर्यावरण एवं वन विभाग के निर्देशों के तहत रोहतास और कैमूर वन्यजीव अभयारण्यों के साथ-साथ मुंगेर स्थित भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में सड़क निर्माण और संधारण कार्यों के लिए बिटुमिनस कोल्ड मिक्स तकनीक का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है। इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की आग या उच्च तापमान वाली तकनीक के उपयोग पर प्रतिबंध है। इसी कारण पथ प्रमंडल भभुआ, डेहरी-ऑन-सोन और मुंगेर के अंतर्गत आने वाले वन मार्गों में कोल्ड मिक्स तकनीक से सड़क निर्माण और मरम्मत का प्रावधान किया गया है।
अलग मशीनरी और तकनीक के कारण रखी गई विशेष अर्हता
पथ निर्माण विभाग ने बताया कि बिटुमिनस कोल्ड मिक्स कार्य के लिए विशेष प्लांट, मशीनरी और तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है। इसी वजह से वन्यप्राणी अंचल पटना द्वारा दी गई सशर्त अनुमति के अनुरूप संबंधित निविदाओं में संवेदकों (ठेकेदारों) के लिए कोल्ड मिक्स कार्य का विशिष्ट अनुभव होना अनिवार्य किया गया है।
100 पैकेजों में से सिर्फ तीन में लागू है यह शर्त
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि OPRMC-Third के तहत कुल 100 पैकेजों की निविदा राष्ट्रीय स्तर पर जारी की गई है। इनमें से केवल तीन पैकेज ऐसे हैं, जहां बिटुमिनस कोल्ड मिक्स तकनीक का उपयोग प्रस्तावित है और उन्हीं पैकेजों में विशेष अनुभव की शर्त लागू की गई है।
विभाग ने बताया तकनीकी आवश्यकता, नहीं किया गया कोई अवांछित बदलाव
पथ निर्माण विभाग का कहना है कि निविदा शर्तों में किया गया प्रावधान किसी विशेष एजेंसी को लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि वन क्षेत्रों में लागू पर्यावरणीय मानकों और तकनीकी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया गया है। विभाग ने मीडिया में चल रही भ्रामक खबरों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई है।