नई दिल्ली: जून 2026 का महीना सर्राफा बाजार के लिए भारी उतार-चढ़ाव वाला साबित हुआ। मई में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद जून के दौरान सोने और चांदी दोनों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। सबसे बड़ी गिरावट चांदी में देखने को मिली, जिसकी कीमत लगभग ₹48,000 प्रति किलोग्राम तक नीचे आ गई। वहीं सोना भी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से करीब ₹18,000 प्रति 10 ग्राम तक फिसल गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक आर्थिक कारण जिम्मेदार हैं। इनमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर सख्त नीति, अमेरिकी डॉलर की मजबूती, वैश्विक स्तर पर मुनाफावसूली और निवेशकों की बदलती रणनीति प्रमुख हैं।

सप्ताह की शुरुआत भी सर्राफा बाजार के लिए कमजोर रही। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार को सोने और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई।
कारोबार के दौरान सोना लगभग ₹1,022 या 0.71 प्रतिशत की कमजोरी के साथ करीब ₹1,43,140 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं चांदी में भी तेज बिकवाली देखने को मिली और इसकी कीमत करीब ₹1,900 से अधिक टूटकर लगभग ₹2,19,500 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई।
लगातार चौथे सप्ताह कीमतों में दबाव रहने से निवेशकों में सतर्कता बढ़ गई है।

मई के अंतिम सप्ताह में चांदी ने MCX पर करीब ₹2.67 लाख प्रति किलोग्राम का ऐतिहासिक स्तर छुआ था। लेकिन जून के अंत तक इसकी कीमत घटकर लगभग ₹2.19 लाख प्रति किलोग्राम रह गई।
इस तरह केवल एक महीने में चांदी करीब ₹48,000 प्रति किलोग्राम यानी लगभग 18 प्रतिशत तक सस्ती हो गई।
वहीं सोने ने मई के दौरान करीब ₹1.61 लाख प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर बनाया था। जून के अंत तक इसकी कीमत घटकर लगभग ₹1.43 लाख प्रति 10 ग्राम रह गई। यानी सोना लगभग ₹18,000 प्रति 10 ग्राम या करीब 11 प्रतिशत तक सस्ता हो गया।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक यानी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति है।
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड की ओर से ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने के संकेत दिए गए हैं। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं तो निवेशक सोना और चांदी जैसी बिना ब्याज वाली परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी और अन्य ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख करने लगते हैं।
इसका सीधा असर बुलियन बाजार पर पड़ता है और कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
सोने और चांदी की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स की मजबूती का भी बड़ा असर पड़ा है।
जब डॉलर मजबूत होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना और चांदी विदेशी निवेशकों के लिए महंगे हो जाते हैं। इससे इन धातुओं की मांग कम होती है और कीमतों पर दबाव बढ़ जाता है।
इसके अलावा मई में रिकॉर्ड तेजी के बाद कई बड़े निवेशकों ने मुनाफावसूली भी की, जिससे बाजार में बिकवाली और तेज हो गई।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा गिरावट एक अवसर हो सकती है। हालांकि अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से खरीदारी करें। इससे कीमतों में आगे होने वाले उतार-चढ़ाव का जोखिम कम किया जा सकता है।
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें प्रमुख हैं—
अमेरिकी रोजगार आंकड़े
फेडरल रिजर्व की अगली मौद्रिक नीति बैठक
डॉलर इंडेक्स की चाल
वैश्विक महंगाई के आंकड़े
पश्चिम एशिया और अन्य क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव
यदि इन मोर्चों पर अनिश्चितता बढ़ती है तो निवेशक फिर से सुरक्षित निवेश (Safe Haven) के तौर पर सोने और चांदी की ओर लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिकी फेड ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखता है और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो बुलियन बाजार पर दबाव कुछ समय और जारी रह सकता है।
हालांकि यदि भविष्य में ब्याज दरों में कटौती के संकेत मिलते हैं, महंगाई नियंत्रित होती है या वैश्विक आर्थिक जोखिम बढ़ते हैं, तो सोने और चांदी में एक बार फिर तेजी लौट सकती है।