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27 जून का इतिहास: दुनिया का पहला ATM, पहला परमाणु बिजलीघर और जिबूती की आजादी... जानिए आज के दिन हुई बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं

प्रकाशित: 27-06-2026 09:55 AM
27 जून का इतिहास: दुनिया का पहला ATM, पहला परमाणु बिजलीघर और जिबूती की आजादी... जानिए आज के दिन हुई बड़ी ऐतिहासिक घटनाएं
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 इतिहास में हर तारीख अपने साथ कई यादगार घटनाएं समेटे होती है और 27 जून भी ऐसी ही एक खास तारीख है। विज्ञान, तकनीक, राजनीति और मानवाधिकार के क्षेत्र में इस दिन कई ऐसे फैसले और उपलब्धियां दर्ज हुईं, जिन्होंने दुनिया की दिशा बदल दी। दुनिया का पहला ऑटोमेटेड टेलर मशीन (ATM), पहला व्यावसायिक परमाणु बिजलीघर, अफ्रीकी देश जिबूती की आजादी और अमेरिका में समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने जैसे ऐतिहासिक फैसले इसी दिन हुए थे।

आइए जानते हैं कि आखिर 27 जून विश्व इतिहास में इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है।

दुनिया का पहला ATM इसी दिन शुरू हुआ

World first atm machine was introduced on 27 june 1967 in london outside of barclays  bank branch | इस देश में लगाया गया था दुनिया का पहला ATM, कैसे मिला था इसके

आज बैंकिंग की दुनिया में ATM एक सामान्य सुविधा है, लेकिन इसकी शुरुआत 27 जून 1967 को हुई थी। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में Barclays Bank की एनफील्ड शाखा में दुनिया का पहला ATM लगाया गया।

इस मशीन की कल्पना ब्रिटिश आविष्कारक जॉन शेफर्ड-बैरन (John Shepherd-Barron) ने की थी। कहा जाता है कि एक दिन बैंक बंद होने के कारण उन्हें पैसे नहीं मिल सके। इसी अनुभव ने उन्हें ऐसी मशीन बनाने का विचार दिया, जिससे बैंक बंद होने पर भी लोग नकदी निकाल सकें।

इस ATM से सबसे पहले पैसे निकालने वाले व्यक्ति ब्रिटिश अभिनेता रेग वार्नी (Reg Varney) थे। उस समय प्लास्टिक डेबिट कार्ड नहीं होते थे, बल्कि विशेष कागजी वाउचर और चार अंकों के PIN का उपयोग किया जाता था। आज यही तकनीक पूरी दुनिया की बैंकिंग व्यवस्था की रीढ़ बन चुकी है।

दुनिया का पहला परमाणु बिजलीघर

परमाणु ईंधन चक्र | सैन डिएगो का लिन्सियन समूह

27 जून 1954 को तत्कालीन सोवियत संघ ने ओबनिंस्क (Obninsk) में दुनिया का पहला ग्रिड से जुड़ा परमाणु बिजलीघर शुरू किया।

लगभग 5 मेगावाट क्षमता वाले इस संयंत्र ने पहली बार परमाणु ऊर्जा को व्यावसायिक रूप से बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया। इसके बाद दुनिया के कई देशों ने परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम शुरू किए और आज दर्जनों देशों की बिजली व्यवस्था में परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

27 जून 1977: जब जिबूती बना स्वतंत्र राष्ट्र

उप-सहारा अफ्रीका

अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में स्थित छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण देश जिबूती ने 27 जून 1977 को फ्रांस से स्वतंत्रता प्राप्त की।

आजादी से पहले इस क्षेत्र को पहले French Somaliland और बाद में French Territory of the Afars and the Issas कहा जाता था। 8 मई 1977 को हुए जनमत संग्रह में अधिकांश लोगों ने स्वतंत्रता के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद 27 जून को आधिकारिक रूप से Republic of Djibouti अस्तित्व में आया।

आज यह दिन जिबूती का राष्ट्रीय दिवस है और पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।

आखिर फ्रांस ने जिबूती पर कब्जा क्यों किया?

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19वीं शताब्दी में यूरोपीय देशों के बीच अफ्रीका में उपनिवेश बनाने की होड़ लगी हुई थी। जिबूती की भौगोलिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती थी।

यह देश Bab-el-Mandeb जलडमरूमध्य के किनारे स्थित है, जहां से लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच दुनिया का बड़ा समुद्री व्यापार गुजरता है।

1862 में फ्रांस ने स्थानीय अफार शासकों से समझौता कर ओबॉक बंदरगाह पर अधिकार प्राप्त किए। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया गया और 1888 में इसे फ्रेंच सोमालीलैंड घोषित कर दिया गया।

आजादी के बाद कैसे बदला जिबूती?

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आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में जिबूती को आर्थिक चुनौतियों, राजनीतिक अस्थिरता और जातीय संघर्षों का सामना करना पड़ा। 1991 से 1994 के बीच गृहयुद्ध भी हुआ।

हालांकि शांति समझौते के बाद देश ने तेजी से विकास की राह पकड़ी। इथियोपिया का अधिकांश समुद्री व्यापार जिबूती के बंदरगाह से होने लगा। अमेरिका, फ्रांस, चीन और जापान जैसे देशों ने यहां सैन्य और आर्थिक निवेश किया।

आज जिबूती अफ्रीका का एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स और समुद्री व्यापार केंद्र बन चुका है। इसकी अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से बंदरगाह सेवाओं, ट्रांजिट व्यापार और विदेशी निवेश पर आधारित है।

भारत और जिबूती के रिश्ते क्यों हैं खास?

Operation Rahat,पीएम मोदी के एक फोन कॉल से सऊदी ने की थी यमन में ऑपरेशन राहत  में मदद: सुषमा स्वराज - saudi arab helped india in rescuing indians from  yemen - Asian

भारत ने जिबूती की स्वतंत्रता के तुरंत बाद उसे मान्यता दे दी थी। दोनों देशों के बीच दशकों से मित्रतापूर्ण संबंध हैं।

2015 में यमन संकट के दौरान भारत ने ऑपरेशन राहत चलाकर हजारों भारतीयों और विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला था। इस अभियान में जिबूती ने अपना बंदरगाह और हवाई अड्डा उपलब्ध कराया, जिसकी वजह से यह मिशन सफल हो सका।

भारत और जिबूती आज समुद्री सुरक्षा, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा सहयोग, डिजिटल तकनीक और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

जिबूती हिंद महासागर और लाल सागर के बीच स्थित होने के कारण भारत की SAGAR (Security and Growth for All in the Region) नीति का भी महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।

अमेरिका में समलैंगिक संबंधों पर लगी रोक खत्म

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27 जून 2003 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने Lawrence v. Texas मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया।

इस फैसले के बाद अमेरिका के कई राज्यों में लागू पुराने कानून स्वतः समाप्त हो गए और इसे मानवाधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया।

महिलाओं के लिए पत्रिका का प्रकाशन

इतिहास में 27 जून 1693 को महिलाओं के लिए शुरुआती पत्रिकाओं में से एक के प्रकाशन का उल्लेख मिलता है। उस दौर में महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक भागीदारी सीमित थी, ऐसे समय में महिला-केंद्रित प्रकाशनों का आरंभ सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

जिबूती कैसे मनाता है अपना स्वतंत्रता दिवस?

हर वर्ष 27 जून को जिबूती में राष्ट्रीय अवकाश रहता है।

इस दिन राजधानी जिबूती सिटी में राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। सेना की परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक अफार और इस्सा समुदाय के नृत्य, स्कूलों में विशेष आयोजन और शाम को भव्य आतिशबाजी इस दिन के प्रमुख आकर्षण होते हैं।

पूरे देश में देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक मेले और राष्ट्रीय एकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

27 जून की प्रमुख ऐतिहासिक घटनाएं

 

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