अयोध्या: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद के भाजपा सरकार की विदाई और सपा की सरकार बनने के दावे पर अयोध्या के कई संतों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
अवधेश प्रसाद का दावा—2027 में बनेगी सपा सरकार
अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सत्ता से बाहर हो जाएगी और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा को 50 सीटें भी नहीं मिलेंगी। अवधेश प्रसाद ने कहा कि भाजपा सरकार की विदाई की शुरुआत अयोध्या से हो चुकी है और जिस अयोध्या से सरकार के सत्ता में आने की शुरुआत हुई थी, वहीं से उसकी विदाई भी होगी।
महंत सीताराम दास का जवाब
साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने अवधेश प्रसाद के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिनका जनाधार कमजोर हो चुका है, वे भाजपा की विदाई की बात कर रहे हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी के शासनकाल का उल्लेख करते हुए रामभक्तों पर गोली चलाए जाने का आरोप लगाया और कहा कि आज वही लोग राम और अयोध्या की बात कर रहे हैं। महंत सीताराम दास ने दावा किया कि 2027 के चुनाव में समाजवादी पार्टी 27 सीटों तक सिमट जाएगी, जबकि भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ दोबारा सरकार बनाएगी। उन्होंने प्रदेश में कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर भी भाजपा सरकार की सराहना की।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य की प्रतिक्रिया
तपस्वी छावनी के जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि अवधेश प्रसाद के बयान से यह संकेत मिलता है कि वे स्वयं मानते हैं कि भगवान राम की कृपा से भाजपा सत्ता में आई थी। उन्होंने दावा किया कि यदि ऐसा है, तो 2027 में भी भाजपा की जीत सुनिश्चित है।
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज का बयान
महामंडलेश्वर विष्णु दास महाराज ने भी अवधेश प्रसाद के दावे को खारिज करते हुए कहा कि भगवान राम सबके हैं और उनकी कृपा भाजपा पर बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 में योगी आदित्यनाथ एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि फैजाबाद लोकसभा सीट से अवधेश प्रसाद की जीत को भी भगवान राम की कृपा के रूप में देखा जाना चाहिए।
बयानों से गरमाई प्रदेश की सियासत
अवधेश प्रसाद के बयान और उस पर संतों की प्रतिक्रियाओं के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। सभी बयान संबंधित नेताओं और संतों के दावों एवं राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के रूप में सामने आए हैं।