गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से साइबर अपराध का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने एक बार फिर 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर हो रही ठगी के बढ़ते खतरे को उजागर कर दिया है। साइबर ठगों ने 84 वर्षीय सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक और उनकी पत्नी को कथित तौर पर 12 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए मानसिक दबाव में रखा और फर्जी कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उनसे करीब 2.20 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना न केवल साइबर अपराधियों के नए तरीकों को सामने लाती है, बल्कि यह भी बताती है कि किस तरह वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाकर उनकी जीवनभर की कमाई लूटी जा रही है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित राम प्रकाश हरिया, जो करीब 25 वर्ष पहले बैंक प्रबंधक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, गाजियाबाद के वैशाली स्थित रामप्रस्थ ग्रीन्स सोसाइटी में अपनी पत्नी के साथ रहते हैं।
बताया गया है कि 22 मई को उन्हें व्हाट्सएप पर एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को दिल्ली के दरियागंज पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया और दावा किया कि वर्ष 2023 के कथित 538 करोड़ रुपये के केनरा बैंक गबन मामले में उनका नाम सामने आया है।
इसके बाद ठगों ने उन्हें कथित जांच का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें "डिजिटल अरेस्ट" किया जा रहा है और जांच पूरी होने तक वे किसी से संपर्क नहीं कर सकते।

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगों ने दंपति को लगातार 12 दिनों तक वीडियो कॉल के जरिए अपने नियंत्रण में रखा। हर दिन कई घंटों तक उनसे पूछताछ की जाती रही और उन्हें गिरफ्तारी, जेल तथा संपत्ति जब्त होने का डर दिखाया गया।
आरोपियों ने उन्हें निर्देश दिया कि वे किसी परिजन, मित्र या बैंक अधिकारी से संपर्क न करें। यही वजह रही कि दंपति लंबे समय तक किसी को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं दे सके।
जांच के अनुसार, मानसिक दबाव और लगातार निगरानी के कारण पीड़ित दंपति पूरी तरह ठगों की बातों पर विश्वास करने लगे।

इस साइबर ठगी को विश्वसनीय बनाने के लिए आरोपियों ने कथित तौर पर वीडियो कॉल पर फर्जी अदालत (Fake Court) का भी सहारा लिया।
पीड़ितों के अनुसार, वीडियो कॉल पर अलग-अलग समय पर खुद को पुलिस अधिकारी, ईडी अधिकारी और यहां तक कि नकली जज बताने वाले लोग भी शामिल हुए। उन्होंने दंपति को विश्वास दिलाया कि यदि वे जांच में सहयोग करेंगे और अपनी जमा पूंजी एक "सुरक्षित सरकारी खाते" में ट्रांसफर कर देंगे, तो जांच पूरी होने के बाद पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।
इसी झांसे में आकर बुजुर्ग दंपति ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी अलग-अलग बैंक खातों में भेज दी।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर ठगों ने केवल बैंक खाते में मौजूद रकम ही नहीं, बल्कि पीड़ितों से करीब 70 लाख रुपये अतिरिक्त उधार और लोन लेकर भी ट्रांसफर करा लिए।
पूरी ठगी कई चरणों में की गई। आरोपियों ने हर बार अलग-अलग बैंक खाते उपलब्ध कराए ताकि पैसों का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
कुल मिलाकर दंपति से लगभग 2.20 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए।
पुलिस के अनुसार, पैसे ट्रांसफर होने के बाद भी कुछ दिनों तक साइबर ठग दंपति को यह भरोसा दिलाते रहे कि जांच जारी है और जल्द ही पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।
जब अचानक उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया और किसी भी नंबर से जवाब मिलना बंद हो गया, तब पीड़ितों को एहसास हुआ कि वे एक बड़े साइबर फ्रॉड का शिकार हो चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने गाजियाबाद साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।

गाजियाबाद साइबर पुलिस ने संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
जांच एजेंसियां फिलहाल बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, व्हाट्सएप वीडियो कॉल, डिजिटल ट्रांजैक्शन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही हैं।
अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी भी जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, "डिजिटल अरेस्ट" भारत के किसी भी कानून में मान्य प्रक्रिया नहीं है।
कोई भी पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अदालत किसी व्यक्ति को वीडियो कॉल पर गिरफ्तार नहीं करती। न ही कोई सरकारी एजेंसी जांच के नाम पर किसी नागरिक को अपने बैंक खाते से पैसा किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर करने के लिए कहती है।
साइबर अपराधी सरकारी अधिकारी बनकर लोगों में डर पैदा करते हैं और फिर उसी मानसिक दबाव का फायदा उठाकर उनसे पैसे ठग लेते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर धमकाए, तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल काट दें।
ऐसी स्थिति में अपने परिवार के सदस्यों को तुरंत जानकारी दें, संबंधित स्थानीय पुलिस से संपर्क करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर तत्काल शिकायत दर्ज कराएं।
किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या रकम किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर न करें।