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12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर के पर्चे नहीं मिलेंगी, केंद्र सरकार ने बदले नियम

प्रकाशित: 10-07-2026 10:41 AM
12% से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं अब बिना डॉक्टर के पर्चे नहीं मिलेंगी, केंद्र सरकार ने बदले नियम
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नई दिल्ली: दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक एथाइल अल्कोहल (Ethyl Alcohol) वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी पैकिंग में मिलने वाली ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवाएं बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने इन दवाओं को ड्रग्स रूल्स, 1945 के Schedule H1 के दायरे में शामिल कर दिया है।

इस फैसले के बाद ऐसी दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक द्वारा जारी किए गए वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही की जा सकेगी। साथ ही मेडिकल स्टोरों को इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना होगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?

अब बिना डॉक्टर की पर्ची के नहीं मिलेंगी दवाएं, जल्द बदल जाएंगे नियम; क्या  है सरकार का प्लान? - Medicines should not be sold without a doctor  prescription know detail

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात को लेकर चिंता जता रहे थे कि अधिक अल्कोहल वाली कुछ दवाओं का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। विशेष रूप से कुछ कफ सिरप और अन्य ओरल मेडिसिन्स का कई मामलों में नशे के लिए दुरुपयोग सामने आया है।

सरकार का मानना है कि बिना चिकित्सकीय सलाह के ऐसी दवाओं का सेवन कई बार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार मरीजों के लिए यह जोखिम और अधिक बढ़ जाता है।

अब किन दवाओं पर लागू होगा नया नियम?

सरकार का बड़ा फैसला! अब बिना लाइसेंस नहीं बिक पाएंगे कई मेडिकेटेड सिरप, नए नियम  लागू| Zee Business Hindi

नया नियम केवल उन दवाओं पर लागू होगा जो निम्न शर्तों को पूरा करती हैं—

ऐसी दवाओं को अब Schedule H1 की श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन्हें केवल डॉक्टर के लिखित प्रिस्क्रिप्शन पर ही खरीदा जा सकेगा।

मेडिकल स्टोरों के लिए क्या होंगे नए नियम?

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सरकार ने दवा विक्रेताओं के लिए भी नई जिम्मेदारियां तय की हैं। अब मेडिकल स्टोर संचालकों को प्रत्येक बिक्री का विस्तृत रिकॉर्ड रखना होगा।

रिकॉर्ड में निम्न जानकारी दर्ज करना अनिवार्य होगा—

इन रिकॉर्ड्स को निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना भी अनिवार्य होगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर जांच एजेंसियां उनकी समीक्षा कर सकें।

पैकिंग पर चेतावनी लिखना भी होगा अनिवार्य

Medicines were distributed to three lakh patients from government  hospitals, after a month the report came that these were non-standard.

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि इन दवाओं की बोतल या पैकेट पर स्पष्ट चेतावनी (Warning Label) दी जाएगी।

लेबल पर उल्लेख होगा कि—

"यह Schedule H1 दवा है। इसका उपयोग केवल पंजीकृत चिकित्सक की सलाह पर ही करें।"

इसका उद्देश्य लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से रोकना और जागरूकता बढ़ाना है।

क्या है Schedule H1?

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Schedule H1 भारत में उन दवाओं की श्रेणी है जिनकी बिक्री और उपयोग पर विशेष निगरानी रखी जाती है। इस सूची में शामिल दवाओं को बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के बेचना कानूनन प्रतिबंधित होता है।

इन दवाओं की बिक्री के दौरान मेडिकल स्टोरों को पूरा रिकॉर्ड रखना पड़ता है ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा उसकी जांच की जा सके। पहले से इस श्रेणी में कई एंटीबायोटिक्स और अन्य नियंत्रित दवाएं शामिल हैं। अब अधिक अल्कोहल वाली कुछ ओरल दवाओं को भी इसी व्यवस्था के तहत लाया गया है।

सेल्फ-मेडिकेशन पर लगेगी रोक

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने की प्रवृत्ति काफी आम है। कई लोग मामूली खांसी, जुकाम या दर्द होने पर सीधे मेडिकल स्टोर से दवा खरीद लेते हैं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसी दवाओं की अनियंत्रित बिक्री पर रोक लगेगी और मरीजों को डॉक्टर से उचित सलाह लेने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। इससे दवाओं के गलत उपयोग और संभावित दुष्प्रभावों में भी कमी आने की उम्मीद है।

सभी दवाओं पर नहीं होगा असर

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सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी दवाओं पर लागू नहीं होगा। केवल वे ओरल दवाएं जिनमें 12% से अधिक एथाइल अल्कोहल हो और जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर से बड़ी हो, वही Schedule H1 के दायरे में आएंगी।

सामान्य दवाओं और कम अल्कोहल वाली दवाओं की बिक्री पहले की तरह जारी रहेगी।

सरकार का उद्देश्य

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य—

सरकार का मानना है कि इस कदम से अल्कोहल युक्त दवाओं के अनियंत्रित उपयोग में कमी आएगी और मरीजों को बेहतर एवं सुरक्षित चिकित्सकीय देखभाल मिल सकेगी।

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