खबर Supar Fast
होम राशिफल
शॉर्ट वीडियो
ई-पेपर सर्च

महाराष्ट्र में UCC लागू करने की तैयारी तेज: दो सप्ताह में बनेगी ड्राफ्टिंग कमेटी, फडणवीस सरकार ने शुरू की प्रक्रिया

प्रकाशित: 04-07-2026 11:17 AM
महाराष्ट्र में UCC लागू करने की तैयारी तेज: दो सप्ताह में बनेगी ड्राफ्टिंग कमेटी, फडणवीस सरकार ने शुरू की प्रक्रिया
शेयर करें:

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार ने घोषणा की है कि अगले दो सप्ताह के भीतर एक विशेषज्ञ समिति (Expert Committee) का गठन किया जाएगा, जो राज्य के लिए UCC का प्रारूप (Draft Legislation) तैयार करेगी।

सरकार के अनुसार, यह समिति महाराष्ट्र की सामाजिक, कानूनी और संवैधानिक परिस्थितियों का विस्तृत अध्ययन करेगी तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों (Personal Laws) की समीक्षा करने के बाद अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे विधायी प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

क्या करेगी विशेषज्ञ समिति?

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई): पूर्ण नाम, योग्यता, वेतन, भूमिका और  शक्तियां

सरकारी सूत्रों के अनुसार, समिति के गठन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। संभावना है कि इसकी अध्यक्षता किसी सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को सौंपी जाएगी।

यह समिति निम्न प्रमुख विषयों का अध्ययन करेगी—

इसके अलावा समिति विभिन्न न्यायिक फैसलों, संवैधानिक प्रावधानों और अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी, ताकि महाराष्ट्र के लिए एक व्यवहारिक और कानूनी रूप से मजबूत मसौदा तैयार किया जा सके।

सरकार जल्द ही समिति की संरचना, सदस्यों और Terms of Reference (कार्यक्षेत्र) को अंतिम रूप दे सकती है।

सरकार ने पहले भी दिए थे संकेत

महाराष्ट्र में भी समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी, हाईकोर्ट के रिटायर जज की  अध्यक्षता में समिति बनाने का ऐलान - uniform civil code to implemented in  maharashtra ...

इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा में गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने जानकारी दी थी कि राज्य सरकार UCC लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए विशेषज्ञ समिति का गठन किया जाएगा।

उन्होंने कहा था कि सरकार संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों (Directive Principles of State Policy) के अनुरूप आगे बढ़ रही है और समिति का उद्देश्य ऐसा मसौदा तैयार करना होगा जो संविधान के अनुरूप होने के साथ-साथ व्यावहारिक भी हो।

क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC)?

यूनिफार्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता क्यों जरूरी है?

यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों में एक समान नागरिक कानून लागू करना है, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।

वर्तमान में भारत में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानून लागू हैं। UCC लागू होने की स्थिति में इन विषयों पर सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू होगी।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि UCC का स्वरूप और उसका दायरा संबंधित कानून के अंतिम मसौदे पर निर्भर करेगा।

संविधान में क्या है प्रावधान?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने का निर्देश दिया गया है।

अनुच्छेद 44 संविधान के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है। ये सिद्धांत न्यायालय में सीधे लागू नहीं कराए जा सकते, लेकिन सरकारों को नीति निर्माण के दौरान इनका ध्यान रखने की सलाह दी गई है।

इसी संवैधानिक प्रावधान के आधार पर समय-समय पर विभिन्न सरकारों ने UCC पर चर्चा की है।

अन्य राज्यों का अनुभव भी करेगी समिति अध्ययन

महाराष्ट्र सरकार अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का भी अध्ययन करेगी।

वर्तमान में—

सरकार का कहना है कि महाराष्ट्र की समिति इन राज्यों के अनुभवों का विश्लेषण कर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने क्या कहा?

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य में नगर निकाय  चुनाव समय पर और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुसार होंगे ...

 

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि समान नागरिक संहिता संविधान की भावना और सभी नागरिकों के लिए समानता के सिद्धांत के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि सरकार बिना व्यापक कानूनी अध्ययन के कोई निर्णय नहीं लेना चाहती। इसलिए पहले विशेषज्ञ समिति बनाई जा रही है, जो विभिन्न कानूनों, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण फैसलों तथा अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन करेगी।

सरकार के अनुसार, समिति की रिपोर्ट के बाद ही आगे की विधायी प्रक्रिया तय होगी।

विपक्ष ने उठाई व्यापक चर्चा की मांग

UCC को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के नेताओं ने सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए इसे संविधान की भावना के अनुरूप कदम बताया है।

वहीं विपक्षी दलों का कहना है कि यदि सरकार इस विषय पर कानून लाती है, तो उससे पहले सभी धार्मिक समुदायों, सामाजिक संगठनों, विधि विशेषज्ञों और अन्य संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद और विचार-विमर्श किया जाना चाहिए, ताकि सभी पक्षों की चिंताओं पर विचार किया जा सके।

आगे क्या होगी प्रक्रिया?

विशेषज्ञ समिति के गठन के बाद वह विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों, न्यायिक निर्णयों, संवैधानिक प्रावधानों और सामाजिक परिस्थितियों का अध्ययन करेगी।

इसके बाद समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट और UCC का प्रारूप राज्य सरकार को सौंपेगी। सरकार आवश्यक संशोधन करने के बाद मसौदे को मंजूरी दे सकती है और फिर भविष्य में इसे महाराष्ट्र विधानसभा में विधेयक के रूप में पेश किया जा सकता है।

हालांकि, फिलहाल सरकार ने केवल विशेषज्ञ समिति के गठन की घोषणा की है। UCC लागू होने से पहले मसौदा तैयार होना, सरकार की मंजूरी, विधानसभा में विधेयक पारित होना और अन्य संवैधानिक एवं विधायी प्रक्रियाएं पूरी होना अभी बाकी हैं।

0.0
Average Rating
0 Ratings
Tap a star to rate this article: