सरकार के अनुसार, सूची में शामिल सभी व्यक्ति पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके सहयोगी नेटवर्क से जुड़े रहे हैं तथा भारत विरोधी आतंकवादी गतिविधियों, घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, आतंकी फंडिंग, भर्ती और जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क संचालित करने में कथित रूप से सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
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गृह मंत्रालय के अनुसार, सूची में शामिल अधिकांश नाम जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। कुछ व्यक्तियों के संबंध अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से भी बताए गए हैं।
सरकार का कहना है कि इन व्यक्तियों ने सीमा पार से आतंकवाद को बढ़ावा देने, भारत में हिंसक गतिविधियों की साजिश रचने और आतंकी ढांचे को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, सूची में शामिल प्रमुख नामों में शामिल हैं—
गृह मंत्रालय के अनुसार, मोहम्मद शहीद फैसल के संबंध अल-कायदा और आईएसआईएस (ISIS) जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से भी बताए गए हैं।
गृह मंत्रालय का कहना है कि सूची में शामिल कई आतंकियों पर भारत में हुए बड़े आतंकी हमलों और आतंकी साजिशों में शामिल होने के आरोप हैं।
सरकार के अनुसार, इनमें कुछ व्यक्तियों पर—
जैसी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं।
हालांकि, इन आरोपों का आधार गृह मंत्रालय और जांच एजेंसियों द्वारा उपलब्ध कराए गए रिकॉर्ड एवं जांच सामग्री पर आधारित है।

गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 भारत का प्रमुख आतंकवाद-रोधी कानून है।
वर्ष 2019 में इस कानून में संशोधन किया गया, जिसके बाद केवल किसी संगठन को ही नहीं बल्कि किसी व्यक्ति को भी आधिकारिक रूप से आतंकवादी घोषित करने का प्रावधान जोड़ा गया।
यदि किसी व्यक्ति का नाम UAPA की चौथी अनुसूची में शामिल किया जाता है, तो उसके खिलाफ विभिन्न कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल जाता है।
इसके तहत जांच एजेंसियां—
हालांकि, ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को कानून के तहत उपलब्ध न्यायिक प्रक्रिया और कानूनी उपायों का अधिकार भी प्राप्त रहता है।

गृह मंत्रालय का कहना है कि यह कार्रवाई भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सीमा पार से संचालित आतंकी ढांचे पर प्रभावी प्रहार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
सरकार के अनुसार, सूची में शामिल सभी व्यक्ति भारत विरोधी गतिविधियों, आतंकियों की भर्ती, हथियारों की तस्करी, घुसपैठ, आतंकी फंडिंग और हिंसा फैलाने के प्रयासों में कथित रूप से सक्रिय रहे हैं।
सरकार ने इस कदम को आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताया है।
इन 23 नए नामों को चौथी अनुसूची में शामिल किए जाने के बाद UAPA के तहत सूचीबद्ध व्यक्तिगत आतंकवादियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
सरकार का मानना है कि इससे पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क पर दबाव बढ़ेगा, उनके वित्तीय स्रोतों पर कार्रवाई को गति मिलेगी और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अधिक प्रभावी होगी।