अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के मामले ने देशभर में धार्मिक और राजनीतिक बहस छेड़ दी है। इस बीच बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मामले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि "रावण तो ये भी हैं, बस रूप बदल गए हैं। रावण ने माता जानकी का हरण किया था, लेकिन इन्होंने तो राम मंदिर के दान पात्र में लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और करोड़ों लोगों का विश्वास चुरा लिया।"
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी है तो निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार मंदिर में श्रद्धालु केवल धन नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा और विश्वास अर्पित करते हैं। ऐसे में यदि किसी ने उस विश्वास के साथ खिलवाड़ किया है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा मामला है।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की नकदी और बहुमूल्य वस्तुओं के कथित दुरुपयोग को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने प्रारंभिक जांच की। जांच के आधार पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई, जिसके बाद अयोध्या के रामजन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हुई।
शिकायत में मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कुछ कर्मचारियों और अन्य व्यक्तियों पर नकदी तथा बहुमूल्य वस्तुओं के कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।

पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों के कब्जे से करीब 79.80 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।
सभी आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस और SIT अब इस पूरे मामले की वित्तीय जांच, दस्तावेजों के सत्यापन और अन्य संभावित साक्ष्यों को जुटाने में लगी हुई हैं।

प्रारंभिक जांच में चढ़ावे की नकदी, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुओं के लेखा-जोखा में कथित अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गड़बड़ी कब से चल रही थी, इसमें कितने लोग शामिल थे और क्या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क भी सक्रिय था। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि मंदिरों में आने वाला दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं होता, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक होता है।
उन्होंने कहा,
"सत्य तो सत्य है। यदि किसी ने भगवान के मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात किया है तो उसे केवल सरकारी कानून ही नहीं, बल्कि भगवान के न्याय का भी सामना करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि सरकार किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि इस घटना के आधार पर अयोध्या या श्रीराम मंदिर की पवित्रता पर सवाल न उठाएं।
उन्होंने कहा कि सरकार स्वयं मामले की जांच करा रही है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई है।
कांग्रेस ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की है। वहीं आम आदमी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की बात कही है।
दूसरी ओर, सत्तापक्ष का कहना है कि सरकार ने स्वयं जांच शुरू कराई है और एफआईआर दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी भी की है। उनका दावा है कि इससे स्पष्ट है कि किसी भी दोषी को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।
फिलहाल पुलिस और SIT पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन, चढ़ावे के प्रबंधन की प्रक्रिया और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।