अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। अब जांच केवल मंदिर परिसर या चढ़ावे की गिनती तक सीमित नहीं रही, बल्कि बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक पहुंच गई है। जांच के दौरान सामने आई नई जानकारी के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने करीब तीन महीने पहले ही चढ़ावे की नकदी गिनने वाले कर्मचारियों को बदलने की सिफारिश की थी, लेकिन इस सुझाव पर अमल नहीं किया गया। अब यही तथ्य जांच एजेंसियों के लिए एक अहम कड़ी बन गया है।
पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि उस समय बैंक की सलाह पर कार्रवाई कर दी जाती, तो क्या कथित वित्तीय अनियमितताओं को रोका जा सकता था।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में नकद व अन्य स्वरूप में चढ़ावा अर्पित करते हैं। इसी चढ़ावे की गिनती और प्रबंधन के दौरान कथित अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी।
प्रारंभिक जांच में आरोप लगा कि चढ़ावे की नकदी गिनने वाले कुछ कर्मचारियों की गतिविधियां संदिग्ध थीं। इसके बाद मामले की जांच शुरू हुई और कई कर्मचारियों से पूछताछ की गई।

जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के अधिकारियों ने कुछ महीने पहले ही चढ़ावा गिनने वाले कर्मचारियों को बदलने की सिफारिश की थी। बैंक ने इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सुझाव भी दिया था।
सूत्रों के अनुसार, कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाली आउटसोर्सिंग एजेंसी ने उन्हें बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी, लेकिन बाद में यह प्रक्रिया रोक दी गई। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि किन परिस्थितियों में यह निर्णय बदला गया और क्या इसमें किसी स्तर पर हस्तक्षेप हुआ था।
हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें छह कर्मचारी ऐसे बताए जा रहे हैं, जो चढ़ावे की नकदी गिनने के कार्य से जुड़े थे। अन्य आरोपी निगरानी और प्रबंधन व्यवस्था से जुड़े होने की बात सामने आई है।
इन सभी के खिलाफ चोरी, आपराधिक विश्वासघात (Criminal Breach of Trust), साजिश और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल सभी से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां उनके बयान, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसियों ने अब बैंक खातों की भी विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अयोध्या स्थित SBI की नयाघाट शाखा सहित कुल सात बैंकों से पिछले पांच वर्षों का बैंकिंग रिकॉर्ड मांगा है। जांच एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं चढ़ावे की राशि से जुड़े संदिग्ध लेनदेन, असामान्य बैंक ट्रांजैक्शन या धन के गलत उपयोग के संकेत तो नहीं मिले।
यदि वित्तीय रिकॉर्ड में कोई अनियमितता सामने आती है, तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में केवल कथित धन की हेराफेरी ही नहीं, बल्कि चढ़ावा प्रबंधन प्रणाली में भी कई प्रक्रियागत कमियों की ओर संकेत किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार—
हालांकि इन निष्कर्षों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
मामले के सामने आने के बाद इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि यदि बैंक द्वारा दी गई चेतावनी को समय रहते गंभीरता से लिया जाता, तो कथित गड़बड़ियों को रोका जा सकता था।
वहीं जांच एजेंसियों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक टिप्पणी के बजाय केवल उपलब्ध दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है। आरोपियों से पूछताछ के अलावा बैंक अधिकारियों, ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।
यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि जिन धार्मिक संस्थानों में प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नकद चढ़ावा आता है, वहां मजबूत वित्तीय निगरानी व्यवस्था, नियमित ऑडिट, CCTV मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग बेहद जरूरी होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शी व्यवस्था और समय-समय पर कर्मचारियों के रोटेशन जैसी प्रक्रियाएं संभावित अनियमितताओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।