बरेली। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) ने मंगलवार को किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला मुख्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया। जिला प्रभारी चंद्रप्रकाश उर्फ पप्पू गंगवार के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
खाद, गन्ना भुगतान और बिजली व्यवस्था पर उठाए सवाल
किसानों का कहना है कि धान और गन्ने की फसल के लिए इस समय खाद की सबसे अधिक आवश्यकता है, लेकिन किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध नहीं हो रहा है। प्रदर्शन के दौरान किसानों ने आवारा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान, बहेड़ी और नवाबगंज चीनी मिलों द्वारा बकाया गन्ना भुगतान, बिजली आपूर्ति में अनियमितता और अन्य कृषि संबंधी समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।
ज्ञापन में रखीं कई अहम मांगें
भाकियू (टिकैत) ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने, मंडियों में किसानों से होने वाली अवैध कटौती रोकने, उर्वरकों पर सब्सिडी बहाल करने, निजी खाद विक्रेताओं के यहां रेट लिस्ट और स्टॉक बोर्ड अनिवार्य करने तथा भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने की मांग की।
इसके अलावा फरीदपुर क्षेत्र की क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत, किसानों की फार्मर आईडी और भू-अंश संबंधी त्रुटियों का समाधान तथा संगठन के पदाधिकारियों पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमे वापस लेने की भी मांग की गई।
दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज की निंदा
किसान नेताओं ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि निहत्थे छात्रों के साथ बल प्रयोग किया गया। किसान नेताओं ने कहा कि यदि सरकार जल्द किसानों और युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो संगठन प्रदेशभर में व्यापक आंदोलन शुरू करेगा।
राम मंदिर चंदा मामले का भी उठाया मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने राम मंदिर चंदा चोरी के कथित मामले का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि प्रदेश में सामान्य मामलों में बुलडोजर और सख्त कार्रवाई की जाती है, लेकिन भगवान श्रीराम के नाम पर आए चंदे में कथित गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ अब तक कठोर कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने इस मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
भाकियू (टिकैत) ने स्पष्ट किया कि यदि किसानों की मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेगा। किसान नेताओं ने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।