अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में गंभीर रूप से अशक्त अवस्था में मिली एक बाघिन की बेहतर इलाज के लिए कानपुर ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। वन विभाग ने मौत के कारणों का पता लगाने के लिए उसके ऊतकों के नमूने भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजे हैं।
गश्त के दौरान मिली थी कमजोर बाघिन
वन विभाग के अनुसार, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व की अमानगढ़ रेंज के कंपार्टमेंट-4A स्थित नदी क्षेत्र में गश्त के दौरान वनकर्मियों को एक बाघिन बेहद कमजोर और अशक्त अवस्था में मिली। उसकी हालत इतनी खराब थी कि वह चलने-फिरने में भी असमर्थ थी।
बिना ट्रैंक्युलाइज किए किया गया रेस्क्यू
वनकर्मियों ने बाघिन की स्थिति को देखते हुए बिना ट्रैंक्युलाइज किए उसका सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे पिंजरे में रखकर उपचार की प्रक्रिया शुरू की।
कानपुर ले जाते समय हुई मौत
पशु चिकित्सक डॉ. एस.पी. सिंह ने मौके पर बाघिन का स्वास्थ्य परीक्षण किया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए कानपुर चिड़ियाघर रेफर किया गया, लेकिन कानपुर पहुंचने से लगभग 40 किलोमीटर पहले रास्ते में उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम के बाद IVRI भेजे गए नमूने
बाघिन की मौत के बाद तीन वन्यजीव चिकित्सकों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम के बाद ऊतकों के नमूने जांच के लिए IVRI, बरेली भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
वन विभाग ने शुरू की जांच
वन विभाग ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। साथ ही अमानगढ़ टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा को देखते हुए गश्त भी बढ़ा दी गई है।