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ऐतिहासिक FTA के बाद पीएम मोदी का न्यूज़ीलैंड दौरा, भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार

प्रकाशित: 04-07-2026 07:26 AM
ऐतिहासिक FTA के बाद पीएम मोदी का न्यूज़ीलैंड दौरा, भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्तों को मिलेगी नई रफ्तार
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भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हाल ही में हुए भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जुलाई 2026 को न्यूज़ीलैंड की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह दौरा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं, बल्कि दोनों देशों के आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है।

करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूज़ीलैंड यात्रा होगी। न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस दौरे की पुष्टि करते हुए इसे दोनों देशों के संबंधों के लिए "ऐतिहासिक क्षण" बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते के बाद होने वाला यह पहला उच्चस्तरीय दौरा भविष्य में व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देगा।

FTA के बाद पहली बड़ी द्विपक्षीय बैठक

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भारत और न्यूज़ीलैंड ने अप्रैल 2026 में लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला माना जा रहा है।

न्यूज़ीलैंड सरकार के कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को भारत लौटेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यटन, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है

भारत और न्यूज़ीलैंड ने अप्रैल 2026 में लंबे समय से लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला माना जा रहा है।

न्यूज़ीलैंड सरकार के कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी 10 जुलाई को ऑकलैंड पहुंचेंगे और 11 जुलाई को भारत लौटेंगे। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में व्यापार, निवेश, शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृषि, पर्यटन, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

FTA से दोनों देशों को क्या होगा फायदा?

India-New Zealand Free Trade Agreement| India-New Zealand FTA|भारत और  न्यूजीलैंड ट्रेड डील - News18 हिंदी

मुक्त व्यापार समझौते के तहत न्यूज़ीलैंड के लगभग 95 प्रतिशत निर्यात पर भारत द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क (टैरिफ) चरणबद्ध तरीके से समाप्त किए जाएंगे। वहीं करीब 57 प्रतिशत उत्पादों को तत्काल शुल्क-मुक्त बाजार उपलब्ध होगा।

इससे न्यूज़ीलैंड के ऊन, लकड़ी, कीवी फल, वाइन, कोयला और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि डेयरी क्षेत्र को संवेदनशील मानते हुए विशेष सुरक्षा प्रावधान बनाए गए हैं।

दूसरी ओर भारत को भी इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। भारतीय वस्त्र, फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग उत्पाद, मशीनरी, रसायन, इलेक्ट्रॉनिक्स, आभूषण, चमड़ा और कृषि उत्पादों को न्यूज़ीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे और 'मेक इन इंडिया' अभियान को भी मजबूती मिलेगी।

निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

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विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), तकनीकी सहयोग, स्टार्टअप साझेदारी और रोजगार के नए अवसर भी बढ़ेंगे।

भारत की विनिर्माण क्षमता और न्यूज़ीलैंड की उन्नत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तकनीक मिलकर कई संयुक्त परियोजनाओं को जन्म दे सकती हैं। इससे दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

हिंद-प्रशांत रणनीति पर रहेगा विशेष फोकस

new zealand pm christopher luxon announced pm modi to visit the country for  the first time - Prabhasakshi latest news in hindi

प्रधानमंत्री मोदी और क्रिस्टोफर लक्सन की मुलाकात में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता भी प्रमुख एजेंडा होगी।

भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत रणनीति के तहत क्षेत्रीय साझेदारों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है, जबकि न्यूज़ीलैंड भी भारत को एशिया-प्रशांत क्षेत्र का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। दोनों नेता समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी चर्चा करेंगे।

तकनीक, शिक्षा और स्वच्छ ऊर्जा में बढ़ेगा सहयोग

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दौरे के दौरान डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्टार्टअप, स्वच्छ ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनने की उम्मीद है।

भारतीय छात्रों के लिए न्यूज़ीलैंड पहले से ही एक प्रमुख शिक्षा केंद्र है। ऐसे में शिक्षा, कौशल विकास और शोध सहयोग को लेकर भी नए समझौते सामने आ सकते हैं।

भारतीय समुदाय बना दोनों देशों के रिश्तों की मजबूत कड़ी

न्यूज़ीलैंड में रहने वाला भारतीय मूल का समुदाय वहां के सबसे तेजी से बढ़ते समुदायों में शामिल है। भारतीय समुदाय व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक प्रशासन जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

इसी वजह से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध भी लगातार मजबूत हुए हैं और लोगों के बीच संपर्क पहले की तुलना में अधिक गहरा हुआ है।

लक्सन ने बताया 'ऐतिहासिक अवसर'

न्यूज़ीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और न्यूज़ीलैंड के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है।

उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों में रोजगार, आर्थिक विकास और व्यापार विस्तार के नए अवसर पैदा करेगा। उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी का दौरा दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा।

 
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