दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म 'सतलज' को ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के महज 48 घंटे के भीतर हटा दिया गया। निर्देशक हनी त्रेहान की यह फिल्म करीब चार वर्षों तक सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया में अटकी रही। बाद में इसे बिना थिएटर रिलीज के सीधे ओटीटी पर रिलीज किया गया, लेकिन कुछ ही समय बाद प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया।
DSGMC ने किया फिल्म का समर्थन
फिल्म हटाए जाने के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (DSGMC) ने खुलकर इसका समर्थन किया है। समिति ने घोषणा की है कि वह जल्द ही फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित करेगी और जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन एवं योगदान पर सेमिनार भी कराएगी।
हरमीत सिंह कालका ने उठाए सवाल
DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष और 1995 में पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच पर आधारित है। उनका कहना है कि ऐसी फिल्म पर रोक लगाना उचित नहीं है और इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को लोगों तक पहुंचने से रोकना गलत संदेश देता है।
गुल पनाग ने भी रखी अपनी राय
अभिनेत्री गुल पनाग ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि इतिहास के कठिन और दर्दनाक अध्यायों को दिखाने से बचना नहीं चाहिए। उन्होंने लिखा कि पंजाब के उग्रवाद के दौर की घटनाएं उन्होंने करीब से देखी हैं और समाज को ऐसे विषयों पर खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
चार साल तक सेंसर प्रक्रिया में अटकी रही फिल्म
यह फिल्म पहले 'पंजाब 95' नाम से बनाई गई थी। वर्ष 2022 में इसे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पास प्रमाणन के लिए भेजा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म में पहले 21 और बाद में 127 कट लगाने की बात कही गई। मेकर्स ने इन बदलावों का विरोध किया और मामला बॉम्बे हाई कोर्ट तक पहुंचा।
मेकर्स ने अनकट वर्जन किया रिलीज
लंबे विवाद के बाद फिल्म का अनकट संस्करण सीधे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया गया। हालांकि, स्ट्रीमिंग शुरू होने के 48 घंटे के भीतर ही फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। ओटीटी प्लेटफॉर्म ने बयान जारी कर कहा कि वह फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने के लिए प्रयास कर रहा है।
क्या है फिल्म की कहानी?
'सतलज' मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। फिल्म में 1980 और 1990 के दशक के दौरान पंजाब में कथित मानवाधिकार उल्लंघनों, फर्जी मुठभेड़ों और गुप्त अंतिम संस्कारों की जांच तथा उन्हें उजागर करने के उनके प्रयासों को दर्शाया गया है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के प्रमुख सिख मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। उन्होंने कथित तौर पर हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े रिकॉर्ड सामने लाकर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप उजागर किए थे। वर्ष 1995 में उनका अपहरण हुआ और बाद में उनकी हत्या कर दी गई। इस मामले की जांच सीबीआई ने की थी, जिसके बाद कई पुलिस अधिकारियों को दोषी ठहराया गया था।