प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को प्रयागराज के यमुना तट स्थित महर्षि भारद्वाज प्रेरणा स्थल पर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विश्व हिंदू परिषद के पूर्व संरक्षक अशोक सिंघल की प्रतिमाओं का अनावरण किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी समाज का स्थायी विकास उसकी सांस्कृतिक विरासत के सम्मान से ही संभव है और प्रयागराज इसका सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, समरसता और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि शहर में ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास कार्यों को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि प्रयागराज में पातालपुरी मंदिर, सरस्वती कूप और अक्षयवट जैसे ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के संरक्षण और विकास के लिए लगातार कार्य किए गए हैं। उनके अनुसार, जिन स्थानों की पहले उपेक्षा होती थी, उन्हें अब प्रेरणा स्थलों के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं केवल स्मारक नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति, सुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने का माध्यम भी हैं।
कार्यक्रम में जिन तीन महापुरुषों की प्रतिमाओं का अनावरण किया गया, उनके योगदान का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि तीनों ने अलग-अलग क्षेत्रों में देश के विकास और राष्ट्रीय जीवन को दिशा देने का कार्य किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का वर्ष है। उन्होंने भारतीय जनसंघ के संस्थापक के रूप में डॉ. मुखर्जी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। मुख्यमंत्री ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को भी उनके विचारों से जोड़ा।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राजनीति में संवाद, लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन की परंपरा को मजबूत किया। उन्होंने पोखरण परमाणु परीक्षण, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने देश के बुनियादी ढांचे को नई दिशा दी।

मुख्यमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व संरक्षक अशोक सिंघल के योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही और विभिन्न धार्मिक संगठनों तथा संत समाज को एक मंच पर लाने में उन्होंने सक्रिय योगदान दिया।
मुख्यमंत्री ने महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन का उल्लेख करते हुए प्रयागराज के नागरिकों, प्रशासन और विभिन्न विभागों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विशाल संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के बावजूद व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया गया।
उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के माध्यम से पर्यटन, स्थानीय व्यापार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा मिलता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज को धार्मिक, सांस्कृतिक और आधुनिक शहरी विकास के केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए कई आधारभूत संरचना परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें सड़क और पुल निर्माण, एयरपोर्ट विस्तार, स्मार्ट सिटी परियोजनाएं, नदी तट विकास, सांस्कृतिक केंद्र तथा धार्मिक पर्यटन से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की कनेक्टिविटी बेहतर करना, पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ आधुनिक विकास को आगे बढ़ाना है। उन्होंने अयोध्या, काशी, मथुरा, चित्रकूट, नैमिषारण्य और विंध्याचल में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक पर्यटन को प्रदेश की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है और इससे रोजगार तथा निवेश के नए अवसर पैदा हुए हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी विकास परियोजनाओं की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण सहित सभी परियोजनाओं में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने थर्ड पार्टी गुणवत्ता जांच कराने, परियोजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने और जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सांसद प्रवीण पटेल, महापौर उमेश चंद्र गणेश केसरवानी, विधायक सिद्धार्थनाथ सिंह, हर्षवर्धन बाजपेयी, राजमणि कोल, गुरु प्रसाद मौर्य तथा अन्य जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रयागराज देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक नगरों में गिना जाता है। त्रिवेणी संगम, महर्षि भारद्वाज आश्रम, पातालपुरी मंदिर, अक्षयवट और इलाहाबाद किला जैसे स्थल इसकी ऐतिहासिक पहचान हैं। हाल के वर्षों में महाकुंभ, धार्मिक पर्यटन और आधारभूत ढांचे के विकास ने शहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि प्रयागराज यह संदेश देता है कि सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। उनके अनुसार, यदि ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करते हुए विकास किया जाए तो शहर की पहचान भी मजबूत होती है और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलती है।