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मदरसों की ATS जांच पर बोले मौलाना शहाबुद्दीन, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म करने के फैसले का किया विरोध

प्रकाशित: 04-07-2026, 11:06 AM
मदरसों की ATS जांच पर बोले मौलाना शहाबुद्दीन, उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म करने के फैसले का किया विरोध
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उत्तर प्रदेश में मदरसों की जांच की जिम्मेदारी एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (ATS) को सौंपे जाने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार बनने के बाद मदरसों की कई बार जांच हो चुकी है और अब पांचवीं बार एटीएस को जांच की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि मदरसा प्रबंधन इस जांच का स्वागत करता है।

'मदरसों के रिकॉर्ड पूरी तरह पारदर्शी'

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने कहा कि एटीएस के अधिकारी जब भी मदरसों में जांच के लिए आएंगे, उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज और रजिस्टर उपलब्ध कराए जाएंगे। उनके अनुसार मदरसों का पूरा लेखा-जोखा और कानूनी दस्तावेज पारदर्शी हैं और जांच एजेंसियों के लिए हमेशा खुले हैं।

हाईकोर्ट के फैसले का किया जिक्र

उन्होंने कहा कि एटीएस जांच के खिलाफ मदरसा संगठनों की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था, लेकिन अदालत ने जांच पर रोक लगाने से इनकार करते हुए जांच का रास्ता साफ कर दिया। मौलाना ने कहा कि अब मदरसा प्रबंधन कानून के दायरे में रहते हुए जांच में पूरा सहयोग करेगा।

उत्तराखंड मदरसा बोर्ड खत्म करने पर जताई आपत्ति

मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने उत्तराखंड सरकार द्वारा मदरसा बोर्ड को समाप्त किए जाने के फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय संविधान की भावना के विपरीत है। उनका दावा है कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत अल्पसंख्यकों को अपनी धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित करने और संचालित करने का अधिकार प्राप्त है।

शिक्षा और भाषा को लेकर भी जताई चिंता

मौलाना ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त किए जाने के बाद कई मदरसों पर ताले लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश में हिंदी, सिंधी, उर्दू और अरबी-फारसी जैसी भाषाओं के विकास के लिए विभिन्न अकादमियों और बोर्डों की स्थापना की गई थी, लेकिन अब उर्दू और अरबी भाषा से जुड़े संस्थानों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है, जो चिंता का विषय है।

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