
हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 30 जून को प्रवेश किया था। इसके बाद से लगातार बारिश के कारण राज्य के कई हिस्सों में भूस्खलन, फ्लैश फ्लड, पेड़ गिरने, सड़क धंसने और चट्टानें गिरने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई स्थानों पर संपर्क मार्ग टूट गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क भी प्रभावित हुआ है।
राज्य सरकार, जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश के कारण राहत कार्यों में भी मुश्किलें आ रही हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मानसून से संबंधित घटनाओं में अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है।
प्रशासन के अनुसार अधिकांश मौतें भूस्खलन, डूबने, करंट लगने, पेड़ गिरने और चट्टान गिरने जैसी घटनाओं में हुई हैं। इसके अलावा मानसून के दौरान हुई दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में भी दो लोगों की जान गई है।

लगातार बारिश और भूस्खलन के चलते राज्यभर में 49 सड़कें बंद हैं।
सबसे ज्यादा असर कुल्लू जिले में देखने को मिला है, जहां 30 सड़कें बंद हैं। इनमें निर्मंड उपमंडल सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है।
अन्य प्रभावित जिले:
लोक निर्माण विभाग (PWD) की टीमें जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से मलबा हटाने और सड़कों को दोबारा खोलने का काम युद्धस्तर पर कर रही हैं।

मानसून का असर केवल सड़क नेटवर्क तक सीमित नहीं है।
लगातार बारिश के कारण राज्य में 42 बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर (DTR) ठप हो गए हैं, जिससे कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। सबसे अधिक प्रभावित जिला सिरमौर है।
वहीं 27 पेयजल योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिनमें अधिकांश चंबा जिले की हैं। जल शक्ति विभाग और बिजली बोर्ड की टीमें क्षतिग्रस्त लाइनों और जलापूर्ति योजनाओं को जल्द बहाल करने के लिए लगातार काम कर रही हैं।
राज्य सरकार के प्रारंभिक आकलन के अनुसार अब तक सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को लगभग 69.65 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
सबसे अधिक आर्थिक नुकसान लाहौल-स्पीति जिले में दर्ज किया गया है। इसके अलावा कांगड़ा और शिमला में भी सड़कों, पुलों और अन्य सरकारी परिसंपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। प्रशासन का कहना है कि नुकसान का आकलन अभी जारी है और बारिश जारी रहने के कारण यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA), राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC), राजस्व विभाग, लोक निर्माण विभाग, बिजली बोर्ड, जल शक्ति विभाग और जिला प्रशासन मिलकर राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं।
भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से मलबा हटाया जा रहा है, क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों की मरम्मत की जा रही है तथा बंद पेयजल योजनाओं को दोबारा शुरू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। संवेदनशील इलाकों में पुलिस और प्रशासन की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में अगले कुछ दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।
मौसम विभाग ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सलाह दी है कि वे:
प्रशासन ने भी लोगों से किसी भी आपात स्थिति में हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।

हिमाचल प्रदेश में बड़ी संख्या में पर्यटक इन दिनों घूमने पहुंच रहे हैं। प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करें। जिन इलाकों में भारी बारिश या भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है, वहां जाने से बचें और होटल या स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।