बिहार सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बिहार तकनीकी सेवा आयोग (BTSC) की अनुशंसा पर चयनित 846 सफल फार्मासिस्ट अभ्यर्थियों की राज्य के विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापना कर दी गई है।
सरकारी अस्पतालों में दूर होगी फार्मासिस्टों की कमी
नई नियुक्तियों के बाद जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), रेफरल अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में फार्मासिस्टों की कमी काफी हद तक दूर होगी। इससे दवा वितरण व्यवस्था बेहतर होगी, औषधि प्रबंधन मजबूत होगा और मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
मेरिट और पारदर्शिता के आधार पर हुई पदस्थापना
स्वास्थ्य विभाग ने पदस्थापना प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट आधारित बनाया। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सॉफ्टवेयर के जरिए रैंडमाइजेशन प्रक्रिया अपनाई गई। दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्राथमिकता के आधार पर उनके गृह जिले में तैनाती दी गई, जबकि महिला अभ्यर्थियों को उनकी मेरिट के अनुसार निकटवर्ती या पड़ोसी जिलों में पदस्थापित करने का प्रयास किया गया।
एक महीने के भीतर देना होगा योगदान
सभी नवपदस्थापित फार्मासिस्टों को निर्देश दिया गया है कि वे एक माह के भीतर अपने सभी मूल शैक्षणिक और आवश्यक प्रमाण-पत्रों के साथ संबंधित स्वास्थ्य संस्थान में योगदान दें। नियुक्ति के बाद संस्थान प्रमुख उनके दस्तावेजों का सत्यापन करेंगे और तीन माह के भीतर पूरी जांच प्रक्रिया पूरी कर स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भेजेंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी शुभकामनाएं
स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने सभी चयनित फार्मासिस्टों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में फार्मासिस्टों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य हर सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराकर लोगों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में अहम कदम
सरकार का मानना है कि नई नियुक्तियों से सरकारी अस्पतालों में दवा उपलब्धता और औषधि प्रबंधन में सुधार होगा। साथ ही मरीजों को समय पर बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में भी यह फैसला महत्वपूर्ण साबित होगा।