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अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 8 आरोपी गिरफ्तार, चंपत राय ने दिया इस्तीफा, जांच के घेरे में पूरी व्यवस्था

प्रकाशित: 26-06-2026 12:28 PM
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा विवाद: 8 आरोपी गिरफ्तार, चंपत राय ने दिया इस्तीफा, जांच के घेरे में पूरी व्यवस्था
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 राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में दर्ज एफआईआर के सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसी बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके साथ ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया है। इन घटनाक्रमों के बाद यह मामला केवल कथित चढ़ावा चोरी तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

 कैसे सामने आया मामला?

रामलला के दरबार में अब तक डेढ़ करोड़ श्रद्धालु लगा चुके हाजिरी, 1 लाख  विदेशी भक्‍त भी - ayodhya news more than 1.5 crore devotees reached in ram  mandir - Navbharat Times

राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा प्रतिदिन करोड़ों रुपये मूल्य का नकद और अन्य चढ़ावा अर्पित किया जाता है। कुछ दिनों पहले चढ़ावे की गिनती और रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में वित्तीय निगरानी और चढ़ावा प्रबंधन में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया, जिसके बाद अयोध्या पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।

 आठ आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के अनुसार एफआईआर में नामजद सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें चढ़ावे की नकदी गिनने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजी रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है। कुछ आरोपियों के पास से कथित रूप से नकदी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल पुलिस पूरे वित्तीय लेनदेन और चढ़ावा प्रबंधन की जांच कर रही है।

 चंपत राय का इस्तीफा

गिरफ्तारियों के एक दिन बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए यह फैसला लिया। ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि चंपत राय का नाम वर्तमान एफआईआर में आरोपी के रूप में शामिल नहीं है और उनके खिलाफ अब तक किसी जांच एजेंसी ने आपराधिक आरोप तय नहीं किए हैं।

 विपक्ष ने उठाए सवाल

समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का आरोप है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित है, जबकि पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्च स्तर तक जांच होनी चाहिए। विपक्ष ने न्यायिक या स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की भी मांग की है।

 सरकार का क्या कहना है?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई और जांच पूरी तरह निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी अपील की कि कुछ लोगों की कथित हरकतों के आधार पर अयोध्या और राम मंदिर की गरिमा पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए।

 आगे क्या होगी कार्रवाई?

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित गड़बड़ी कितने समय से चल रही थी, कितनी राशि प्रभावित हुई और क्या इसमें अन्य लोगों की भी भूमिका रही है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल डेटा और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। यदि जांच के दौरान किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

 आस्था के साथ पारदर्शिता भी जरूरी

राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे से जुड़े किसी भी कथित वित्तीय घोटाले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक संस्थाओं में पारदर्शी वित्तीय व्यवस्था और नियमित ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में ऐसे विवादों को रोकने में मदद कर सकती हैं।

फिलहाल इस मामले में आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि ट्रस्ट स्तर पर भी बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। अब पूरे देश की नजर एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी आखिर किन लोगों तक तय होती है।                                        

 ( RITIKA)

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