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हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में बड़ा बदलाव: अब बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे पुजारी, चढ़ावे की निगरानी करेगी 7 सदस्यीय समिति

प्रकाशित: 07-07-2026 06:56 AM
हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में बड़ा बदलाव: अब बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे पुजारी, चढ़ावे की निगरानी करेगी 7 सदस्यीय समिति
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हरिद्वार: उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब मंदिर में ड्यूटी के दौरान सभी पुजारी बिना जेब वाले विशेष कुर्ते पहनेंगे। इसके साथ ही चढ़ावे, दान, साफ-सफाई, अनुशासन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं की निगरानी के लिए सात सदस्यीय समिति का गठन किया गया है।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य दान व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना, श्रद्धालुओं का विश्वास मजबूत करना और किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की आशंका को समाप्त करना है।

क्यों लिया गया यह फैसला?

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हाल के समय में देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में चढ़ावे और दान के प्रबंधन को लेकर उठे विवादों के बाद कई धार्मिक संस्थानों ने अपनी व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू की है। इसी क्रम में मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट ने भी प्रशासनिक सुधार लागू करने का निर्णय लिया है।

ट्रस्ट का मानना है कि श्रद्धालुओं का विश्वास किसी भी धार्मिक संस्था की सबसे बड़ी पूंजी होता है। इसलिए दान से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे पुजारी

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मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि अब ड्यूटी के दौरान कोई भी पुजारी जेब वाला कुर्ता नहीं पहनेगा। सभी पुजारियों के लिए विशेष रूप से बिना जेब वाली यूनिफॉर्म तैयार कराई जा रही है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चढ़ावे की राशि या अन्य सामग्री किसी भी पुजारी की व्यक्तिगत जेब में न रखी जा सके। मंदिर में प्राप्त होने वाला प्रत्येक दान निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दर्ज किया जाएगा और उसका उचित लेखा-जोखा रखा जाएगा।

सात सदस्यीय समिति करेगी निगरानी

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नई व्यवस्था के तहत गठित सात सदस्यीय समिति को कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। समिति केवल चढ़ावे की निगरानी ही नहीं करेगी, बल्कि मंदिर परिसर की साफ-सफाई, अनुशासन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विशेष आयोजनों के दौरान व्यवस्थाओं पर भी नजर रखेगी।

विशेष रूप से सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए समिति व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करेगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही, गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो समिति तत्काल कार्रवाई की सिफारिश करेगी। गंभीर मामलों में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

दान का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा

मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए प्रत्येक दान का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। जहां आवश्यक होगा, वहां दान की रसीद भी उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अलावा चढ़ावे का दैनिक हिसाब-किताब नियमित रूप से तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो। प्रशासन का कहना है कि इससे वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों मजबूत होंगी।

सीसीटीवी निगरानी होगी और सख्त

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मंदिर परिसर में पहले से लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था को भी और मजबूत किया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य यह है कि दान संग्रह, मंदिर परिसर की गतिविधियों और व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा सके।

ट्रस्ट का मानना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी विवाद की स्थिति में साक्ष्य उपलब्ध रहेंगे।

प्रसाद और पूजा सामग्री को लेकर भी नया नियम

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मंदिर प्रशासन ने पूजा सामग्री और प्रसाद को लेकर भी नई व्यवस्था लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत एक बार भगवान को अर्पित किए गए नारियल, फूल या अन्य प्रसाद को दोबारा किसी अन्य श्रद्धालु के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।

ट्रस्ट के अनुसार, यह निर्णय श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का सम्मान बनाए रखने और पूजा प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है।

सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर भी नजर

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श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं को लेकर कई बार भ्रामक जानकारियां और आरोप प्रसारित किए जाते हैं। ऐसे में मंदिर प्रशासन चाहता है कि उसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी हो, जिससे किसी भी प्रकार की शंका या विवाद की गुंजाइश न रहे।

उन्होंने कहा कि मंदिर में आने वाला प्रत्येक दान समाजहित और धार्मिक कार्यों के लिए उपयोग किया जाएगा तथा श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना ट्रस्ट की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है मनसा देवी मंदिर

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हरिद्वार स्थित मां मनसा देवी मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्र, सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

ऐसे में मंदिर ट्रस्ट का मानना है कि नई व्यवस्थाओं से न केवल दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी, बल्कि श्रद्धालुओं का भरोसा भी और अधिक मजबूत होगा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी साबित होता है, तो देश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों के लिए भी यह एक सकारात्मक उदाहरण बन सकता है।

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