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'सतलुज' विवाद: तीन साल का इंतजार, 48 घंटे की स्ट्रीमिंग और फिर ओटीटी से हटाई गई फिल्म

प्रकाशित: 07-07-2026 08:40 AM
'सतलुज' विवाद: तीन साल का इंतजार, 48 घंटे की स्ट्रीमिंग और फिर ओटीटी से हटाई गई फिल्म
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मुंबई: अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' इन दिनों अपनी कहानी से ज्यादा उसके रिलीज़ और हटाए जाने को लेकर चर्चा में है। लंबे इंतजार के बाद जुलाई 2026 की शुरुआत में यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर रिलीज़ हुई, लेकिन महज 48 घंटे के भीतर इसे भारत में प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया। इसके बाद फिल्म, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

ज़ी5 ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि "वर्तमान परिस्थितियों" के मद्देनज़र फिल्म को भारत में फिलहाल उपलब्ध नहीं रखा जा रहा है। हालांकि, प्लेटफॉर्म ने यह भी कहा कि वह उचित कानूनी और प्रक्रियात्मक माध्यमों से फिल्म को दोबारा उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर काम कर रहा है। हटाए जाने का विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया।

क्या है 'सतलुज' की कहानी?

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'सतलुज' 1980 और 1990 के दशक के पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित एक पीरियड ड्रामा है। फिल्म में एक मानवाधिकार कार्यकर्ता की कहानी दिखाई गई है, जो कथित फर्जी मुठभेड़ों और लापता लोगों से जुड़े मामलों का दस्तावेजीकरण करता है तथा न्याय की मांग उठाता है।

फिल्म में दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं। उनके साथ अर्जुन रामपाल और सुविंदर विक्की भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। निर्देशन हनी त्रेहान ने किया है।

बताया जाता है कि फिल्म का निर्माण अलग-अलग चरणों में विभिन्न शीर्षकों के साथ हुआ। शुरुआती दौर में इसका नाम 'गालुघारा' था, बाद में 'पंजाब 95' रखा गया और अंततः इसे 'सतलुज' नाम से रिलीज़ किया गया।

रिलीज़ से पहले ही विवादों में रही फिल्म

रिलीज के महज 48 घंटे बाद ही ओटीटी से हटाई गई 'सतलुत', दिलजीत दोसांझ का  रिएक्शन आया सामने - diljit dosanjh satluj movie removed from zee5 after 2  days | Webdunia Hindi

फिल्म का विवाद केवल रिलीज़ के बाद शुरू नहीं हुआ था। पिछले कुछ वर्षों से यह सेंसर संबंधी प्रक्रियाओं और प्रमाणन को लेकर चर्चा में रही।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फिल्म को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और निर्माताओं के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे। निर्माताओं का दावा था कि फिल्म में बड़ी संख्या में बदलाव और कट लगाने के सुझाव दिए गए थे। दूसरी ओर, आधिकारिक स्तर पर इन सभी दावों की विस्तृत पुष्टि अलग-अलग पक्षों की ओर से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

निर्माताओं का कहना था कि व्यापक बदलाव किए जाने पर फिल्म की मूल कहानी और उद्देश्य प्रभावित हो सकते हैं।

अचानक रिलीज़, फिर अचानक हटाई गई

भारत में बैन हुई दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज', 4 साल बाद हुई थी रिलीज अब सिर्फ  2 दिन में फिल्म को ओटीटी से हटाया | Diljit Dosanjh's Satluj Removed From OTT  Within

जुलाई 2026 की शुरुआत में ज़ी5 ने बिना बड़े प्रचार अभियान के फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया। रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चर्चा शुरू हुई और कई दर्शकों ने इसकी कहानी तथा अभिनय की सराहना की।

लेकिन दो दिन बाद ही प्लेटफॉर्म ने घोषणा की कि फिल्म भारत में फिलहाल उपलब्ध नहीं रहेगी। ज़ी5 ने अपने संदेश में कहा कि फिल्म ने एक महत्वपूर्ण संवाद शुरू किया है और उसे भविष्य में फिर से उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।

फिलहाल भारत में फिल्म की स्ट्रीमिंग बंद है, जबकि विभिन्न देशों में इसकी उपलब्धता संबंधित क्षेत्रीय लाइसेंस और प्लेटफॉर्म नीतियों पर निर्भर करती है।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं

फिल्म हटाए जाने के बाद कई राजनीतिक नेताओं, सामाजिक संगठनों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।

कुछ संगठनों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया, जबकि कुछ नेताओं ने सरकार से इस निर्णय की प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की। दूसरी ओर, कुछ लोगों का मत है कि ऐतिहासिक और संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों में सामाजिक प्रभाव और सार्वजनिक व्यवस्था जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

सेंसरशिप बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

भारत में बैन हुई दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज', 4 साल बाद हुई थी रिलीज अब सिर्फ  2 दिन में फिल्म को ओटीटी से हटाया | Diljit Dosanjh's Satluj Removed From OTT  Within

'सतलुज' को लेकर सबसे बड़ी बहस इस बात पर केंद्रित है कि ऐतिहासिक और विवादित विषयों पर बनी फिल्मों के साथ किस प्रकार का संतुलन अपनाया जाना चाहिए।

एक पक्ष का मानना है कि सिनेमा समाज के कठिन और संवेदनशील अध्यायों को सामने लाने का माध्यम है तथा इतिहास के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा लोकतांत्रिक समाज का हिस्सा होनी चाहिए।

दूसरा पक्ष मानता है कि ऐसे विषयों को प्रस्तुत करते समय सामाजिक संवेदनशीलता, सार्वजनिक शांति और तथ्यात्मक संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है, ताकि किसी समुदाय की भावनाएं प्रभावित न हों या नए विवाद उत्पन्न न हों।

आगे क्या?

फिलहाल 'सतलुज' का भविष्य स्पष्ट नहीं है। ज़ी5 ने संकेत दिया है कि वह उपलब्ध कानूनी और प्रक्रियात्मक विकल्पों पर विचार कर रहा है। यदि आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो भविष्य में फिल्म दोबारा भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध कराई जा सकती है।

यह मामला केवल एक फिल्म तक सीमित नहीं रह गया है। इसने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों के संदर्भ में रचनात्मक अभिव्यक्ति, कानूनी प्रक्रियाओं और सार्वजनिक हित के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

जब तक आधिकारिक स्तर पर आगे की घोषणा नहीं होती, तब तक 'सतलुज' भारतीय दर्शकों के लिए एक ऐसी फिल्म बनी हुई है, जिसकी चर्चा उसकी कहानी से कहीं अधिक उसके विवाद और ओटीटी से हटाए जाने को लेकर हो रही है।

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