कराकास: दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला हाल ही में आए विनाशकारी भूकंपों की तबाही से अभी पूरी तरह उबर भी नहीं पाया था कि शुक्रवार को एक बार फिर धरती कांप उठी। देश के उत्तरी तटीय क्षेत्र के पास आए 4.9 तीव्रता के नए भूकंप ने पहले से भयभीत लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। राजधानी कराकास, मराकाय और आसपास के कई इलाकों में झटके महसूस किए गए, जिसके बाद लोग एहतियातन घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।
यह नया झटका ऐसे समय आया है, जब राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में मलबे में फंसे लोगों की तलाश और आवश्यक सहायता पहुंचाने में जुटे हुए हैं। लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के कारण राहत कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही है।

रिपोर्टों के अनुसार, इससे पहले वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो शक्तिशाली भूकंप आए थे, जिन्होंने कई शहरों में भारी तबाही मचाई। प्रारंभिक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 920 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 3,000 से अधिक लोग घायल बताए गए हैं।
इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों के अब भी लापता होने की आशंका जताई जा रही है। राहत एजेंसियां लगातार खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं, हालांकि समय बीतने के साथ जीवित लोगों के मिलने की उम्मीदें कम होती जा रही हैं।

भूकंप से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में ला गुआइरा (La Guaira) और उसके आसपास के इलाके शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में इमारतें पूरी तरह ढह गई हैं, जबकि कई मकान रहने योग्य नहीं बचे हैं।
इसके अलावा अस्पताल, स्कूल, सरकारी कार्यालय और अन्य सार्वजनिक भवनों को भी नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में बिजली और संचार व्यवस्था बाधित होने से राहत कार्य प्रभावित हुए हैं।
लगातार आ रहे झटकों के कारण बचाव दलों को कई बार अपना अभियान अस्थायी रूप से रोकना पड़ा, ताकि राहतकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला में भारी तबाही की एक बड़ी वजह पुरानी और कमजोर निर्माण व्यवस्था है।
देश के कई हिस्सों में दशकों पहले बनी इमारतें आधुनिक भूकंप-रोधी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। आर्थिक संकट के दौरान पर्याप्त इंजीनियरिंग मानकों के बिना बने कई भवन भी भूकंप का सामना नहीं कर सके।
कुछ अपेक्षाकृत नई इमारतों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता और भवन सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

वेनेजुएला सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। सेना, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने में जुटे हैं।
कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी राहत सामग्री, चिकित्सा सहायता और खोज एवं बचाव दल भेजने की पेशकश की है। विदेशी विशेषज्ञ टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचकर स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
हालांकि खराब सड़कें, ध्वस्त पुल, बाधित संचार व्यवस्था और लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स राहत कार्यों को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार, किसी बड़े भूकंप के बाद छोटे-छोटे झटके आना सामान्य भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है। इन्हें आफ्टरशॉक्स कहा जाता है।
अधिकांश आफ्टरशॉक्स मुख्य भूकंप से कम तीव्रता के होते हैं, लेकिन यदि इमारतें पहले से कमजोर या क्षतिग्रस्त हों तो हल्के झटके भी बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।
इसी वजह से प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे क्षतिग्रस्त भवनों में वापस न लौटें और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवीय संगठनों ने भी इस आपदा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। शुरुआती आकलन के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।
हजारों परिवार बेघर हो चुके हैं और उनके लिए अस्थायी राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयां और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।