राजधानी लखनऊ में अवैध और जर्जर इमारतों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा मांगा है और संबंधित अधिकारियों को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अवैध और जर्जर इमारतों के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट में कार्रवाई की वास्तविक स्थिति और उठाए गए कदमों का पूरा विवरण होना चाहिए।
4 अगस्त को अधिकारियों को किया तलब
अदालत ने 4 अगस्त को स्टेटस रिपोर्ट के साथ संबंधित अधिकारियों को भी उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रिपोर्ट नहीं देने पर अवमानना की चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि निर्धारित समय पर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
280 जर्जर इमारतों पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, लखनऊ शहर में करीब 280 जर्जर इमारतें चिन्हित हैं। आरोप है कि इनमें से कई मामलों में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता पूरी कर दी गई, जबकि जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन की कार्रवाई पर रहेगी अदालत की नजर
सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब संबंधित विभागों और प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि अदालत के निर्देशों के बाद अवैध और जर्जर इमारतों के खिलाफ कार्रवाई में तेजी आएगी।