ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने बरेली में वक्फ संपत्तियों में कथित घोटाले का दावा करते हुए जिला अधिकारी कार्यालय में दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि उन्होंने करीब 50 पन्नों के दस्तावेज प्रशासन को सौंपे हैं, जिनमें वक्फ की जमीनों के कथित अनियमित लेनदेन का विवरण शामिल है।
50 पन्नों के दस्तावेज सौंपने का दावा
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि वह लंबे समय से वक्फ संपत्तियों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी पत्र लिखा था। उनके अनुसार, कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके आरोपों को निराधार बताया था, जिसके बाद उन्होंने जिला अधिकारी को दस्तावेज सौंपे।
दो स्थानों की जमीनों का किया जिक्र
मौलाना ने दावा किया कि उनके दस्तावेजों में बरेली की दो वक्फ संपत्तियों का उल्लेख है।
- तहसील बहेड़ी के गांव जाम सावंत में लगभग 1400 बीघा वक्फ भूमि की वर्तमान बाजार कीमत करीब 220 करोड़ रुपये होने का दावा किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस भूमि का कुछ हिस्सा बेचा जा चुका है और कुछ बेचने की तैयारी है।
- वहीं तहसील सदर के गांव चंद्रपुर बिजपुरी की वक्फ भूमि, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है, उसके भी कथित रूप से बेचे जाने का आरोप लगाया गया।
अखिलेश यादव पर भी साधा निशाना
पत्रकारों से बातचीत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ संपत्तियों में हुए कथित घोटालों पर विपक्ष चुप है, जबकि उनसे लगातार सबूत मांगे जा रहे थे। उन्होंने कहा कि इसी कारण उन्होंने प्रशासन के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं।
320 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा
मौलाना ने दावा किया कि केवल बरेली में ही वक्फ संपत्तियों से जुड़ा करीब 320 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है। उनका आरोप है कि वक्फ बोर्ड के कुछ जिम्मेदार लोगों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की जमीनें कथित तौर पर कम कीमत पर बेची गईं।
वक्फ संपत्तियों के उद्देश्य का किया उल्लेख
मौलाना ने कहा कि वक्फ की जमीनें समाजसेवा, धार्मिक कार्यों और जरूरतमंद लोगों की सहायता के उद्देश्य से दान की गई थीं। उनका आरोप है कि इन संपत्तियों का उपयोग मूल उद्देश्य के अनुरूप नहीं हुआ।