Khabar Supar Fast - Latest News & Updates | खबर | Supar Fast Khabar Supar Fast
होम राशिफल
शॉर्ट वीडियो
ई-पेपर सर्च

पश्चिम चंपारण में 'टापू' बना स्कूल, जान जोखिम में डालकर पढ़ने पहुंच रहे 300 बच्चे

प्रकाशित: 21-07-2026, 04:55 AM
पश्चिम चंपारण में 'टापू' बना स्कूल, जान जोखिम में डालकर पढ़ने पहुंच रहे 300 बच्चे
शेयर करें:

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के नरकटियागंज से ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बदहाल तस्वीर सामने आई है। यहां नरकटियागंज प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सीसई बारिश के बाद पूरी तरह जलजमाव से घिर गया है। हालात ऐसे हैं कि करीब 300 छात्र-छात्राएं और 9 शिक्षक रोजाना जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं।

एक से दो फीट गंदे पानी से होकर गुजरते हैं मासूम

विद्यालय तक जाने के लिए कोई सुरक्षित सड़क या संपर्क मार्ग नहीं है। बच्चों और शिक्षकों को प्रतिदिन एक से दो फीट गंदे पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ता है। छोटे-छोटे बच्चे इसी रास्ते से गुजरकर अपनी पढ़ाई जारी रखने को विवश हैं।

कई बच्चे फिसलकर गिर चुके, शिक्षक संभाल रहे जिम्मेदारी

जलजमाव के कारण कई बच्चे फिसलकर पानी में गिर चुके हैं। किसी बड़े हादसे की आशंका को देखते हुए शिक्षक स्वयं बच्चों को कतार में खड़ा कर उनका हाथ पकड़कर पानी पार कराते हैं, ताकि वे सुरक्षित विद्यालय पहुंच सकें।

वर्षों से सड़क की मांग, नहीं हुआ समाधान

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल तक पक्की सड़क या ऊंचे संपर्क मार्ग के निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। हर बरसात में विद्यालय चारों ओर से पानी से घिर जाता है, जिससे सबसे अधिक परेशानी छोटे बच्चों को उठानी पड़ती है। इसके बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।

अधिकारियों को दी गई जानकारी, कार्रवाई का इंतजार

विद्यालय की प्रधान शिक्षिका नीतू कुमारी ने बताया कि इस समस्या से संबंधित विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

सुरक्षित मार्ग निर्माण की उठी मांग

ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द विद्यालय तक सुरक्षित सड़क या संपर्क मार्ग का निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा के लिए मासूम बच्चों को रोज अपनी जान जोखिम में डालना किसी भी हाल में उचित नहीं है।

ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर

उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सीसई की यह तस्वीर केवल एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को भी उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर कब तक बच्चे शिक्षा पाने के लिए ऐसी जोखिम भरी परिस्थितियों का सामना करते रहेंगे।

0.0
Average Rating
0 Ratings
Tap a star to rate this article: