प्रयागराज: उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव की आहट तेज होती जा रही है। इसी बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रयागराज में आयोजित एक सेमिनार के दौरान शिक्षा, कानून-व्यवस्था, रोजगार और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अपनी पार्टी की प्राथमिकताओं को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में सपा की सरकार बनती है तो कानून के शासन को मजबूत करने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रयागराज के एक होटल में आयोजित "शिक्षा-परीक्षा: क्यों ध्वस्त हुई व्यवस्था" विषयक सेमिनार में शिक्षाविदों, छात्रों, अधिवक्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, सरकारी स्कूलों की स्थिति और युवाओं के भविष्य को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।

अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो कथित फर्जी मुठभेड़ों के मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि कानून का शासन लोकतंत्र की बुनियाद है और हर मामले में न्यायिक प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में पीड़ित परिवारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, इसलिए ऐसे मामलों की जांच आवश्यक है।
हालांकि, यह सपा का राजनीतिक वादा है। इन आरोपों पर सरकार का पक्ष अलग रहा है और राज्य सरकार लगातार कहती रही है कि सभी पुलिस कार्रवाई कानून के दायरे में की जाती है।

अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाए जाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि शिक्षकों का मुख्य कार्य पढ़ाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सपा की सरकार बनती है तो सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा। स्मार्ट क्लास, विज्ञान प्रयोगशाला, कंप्यूटर लैब, स्वच्छ शौचालय और खेल सुविधाओं का विस्तार उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
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पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश की कई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोप लगे हैं। इस मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भविष्य में तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली विकसित की जाएगी।
उन्होंने दावा किया कि एन्क्रिप्टेड डिजिटल सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और परीक्षा प्रक्रिया की बेहतर मॉनिटरिंग के जरिए पेपर लीक जैसी घटनाओं पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर पहले से जारी करने की बात भी कही।

सपा प्रमुख ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव दोबारा शुरू कराने का भी वादा किया। उनका कहना था कि छात्रसंघ लोकतंत्र की पहली पाठशाला है और इससे छात्रों को नेतृत्व विकसित करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति को सकारात्मक दिशा देने के साथ-साथ कैंपस में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है तो बालिकाओं को किंडरगार्टन (केजी) से लेकर पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) तक निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाया जा सकता है और सरकार इस दिशा में छात्रवृत्ति, किताबें और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विचार करेगी। हालांकि इस योजना का विस्तृत वित्तीय खाका अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पर विशेष ध्यान देगी। उन्होंने आईटीआई, पॉलिटेक्निक और आधुनिक तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और नई तकनीकों से जुड़े कोर्स शुरू कर युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार किया जाएगा।

सेमिनार के दौरान अखिलेश यादव ने 'वन नेशन-वन इलेक्शन' के प्रस्ताव का भी विरोध किया। उनका कहना था कि लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए स्थानीय निकाय और छात्रसंघ चुनाव समय पर होना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किए बिना केवल चुनावी व्यवस्था में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रयागराज का यह कार्यक्रम केवल शिक्षा पर चर्चा तक सीमित नहीं था, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का संकेत भी था। अपने भाषण में अखिलेश यादव ने युवाओं, छात्रों, शिक्षकों, महिलाओं और रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता देकर उन वर्गों तक पहुंचने का प्रयास किया जो आगामी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि उनके कई वादों के लिए बड़े बजट और व्यापक प्रशासनिक बदलाव की आवश्यकता होगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त शिक्षा, नई तकनीक आधारित परीक्षा प्रणाली और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन जैसी योजनाओं को लागू करने के लिए विस्तृत नीति और वित्तीय संसाधनों की जरूरत होगी।