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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व

प्रकाशित: 29-06-2026 01:57 PM
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2026: अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
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नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की विधि-विधान से पूजा करने से सुख, समृद्धि और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा पर अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ योगों का संयोग बनने की बात ज्योतिषाचार्यों द्वारा कही जा रही है, जिसे पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन शुभ योगों में किए गए सत्कर्मों का विशेष फल प्राप्त होता है। हालांकि ज्योतिषीय फल व्यक्ति की कुंडली और स्थानीय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

क्यों खास है ज्येष्ठ पूर्णिमा?

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हिंदू धर्म में प्रत्येक पूर्णिमा का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन ज्येष्ठ पूर्णिमा को विशेष रूप से भगवान विष्णु की आराधना, पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य के लिए शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा-अर्चना करने से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है तथा मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कई स्थानों पर इस दिन वट पूर्णिमा व्रत भी मनाया जाता है, जिसमें विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अमृत सिद्धि योग को अत्यंत शुभ योगों में गिना जाता है। मान्यता है कि इस योग में किए गए धार्मिक कार्य, पूजा-पाठ, दान, जप और नए शुभ कार्यों का सकारात्मक फल मिलता है।

वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग को सफलता और शुभ कार्यों की सिद्धि का योग माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में शुरू किए गए कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसी कारण कई लोग इस दिन गृह प्रवेश, वाहन खरीद, निवेश, व्यापार से जुड़े निर्णय या अन्य शुभ कार्य भी करते हैं।

कैसे करें पूजा?

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धार्मिक परंपराओं के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी या तीर्थ में स्नान करना शुभ माना जाता है।

इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। भगवान को पीले पुष्प, तुलसी दल, पंचामृत, फल और मिठाई अर्पित करें। इसके साथ ही "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करना भी शुभ माना जाता है।

शाम के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करने की भी परंपरा है।

दान-पुण्य का विशेष महत्व

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर दान का विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र, जल, फल, अनाज या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करना पुण्यदायी माना जाता है।

गर्मी के मौसम को देखते हुए कई श्रद्धालु इस दिन शीतल जल, छाता, मटका, पंखा और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी करते हैं। माना जाता है कि निस्वार्थ भाव से किया गया दान आध्यात्मिक संतोष और पुण्य प्रदान करता है।

किन बातों का रखें ध्यान?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन—

क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य?

ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि अमृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग पूजा, जप, तप, दान और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल माने जाते हैं। हालांकि वे यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी बड़े धार्मिक अनुष्ठान या शुभ कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और योग्य विद्वान से मुहूर्त की पुष्टि कर लेना उचित रहता है, क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों में तिथि और मुहूर्त में अंतर हो सकता है।

 

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