नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में गुरुवार को 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' पर चर्चा और रायशुमारी का आयोजन किया गया। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए बिहार सहित कई राज्यों के प्रतिनिधि इस बैठक में शामिल हुए। बिहार सरकार की ओर से उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एनके अग्रवाल ने विधेयक का समर्थन करते हुए इसे उच्च शिक्षा क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने में मिलेगी मदद
प्रो. एनके अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार का मानना है कि यह विधेयक शिक्षा व्यवस्था को अधिक सरल, पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने में सहायक साबित होगा। उन्होंने कहा कि इससे उच्च शिक्षा संस्थानों की कार्यप्रणाली में सुधार आएगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर मिल सकेंगे।
एकीकृत ढांचे से कम होगी जटिलताएं
उन्होंने बताया कि विधेयक के तहत नियामक, प्रत्यायन और मानक परिषदों की स्थापना का प्रावधान है। इससे वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं के कारण उत्पन्न होने वाली जटिलताओं में कमी आएगी। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को स्पष्ट दिशा-निर्देश तथा समन्वित मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
तकनीक आधारित प्रशासन को मिलेगा बढ़ावा
उच्च शिक्षा निदेशक ने कहा कि तकनीक आधारित प्रशासनिक व्यवस्था और सूचनाओं के सुव्यवस्थित प्रकटीकरण से शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा मिलेगा। इससे संस्थानों के संचालन में दक्षता बढ़ेगी और विद्यार्थियों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
उत्कृष्ट संस्थानों को मिलेगी अधिक स्वायत्तता
प्रो. अग्रवाल ने विश्वास जताया कि विधेयक लागू होने के बाद उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शैक्षणिक संस्थानों को अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी। इससे नवाचार, अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिलेगा तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और प्रतिस्पर्धी शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे।
शिकायत निवारण और भारतीय ज्ञान परंपरा पर जोर
राज्य सरकार ने विधेयक में शामिल प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र, भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन तथा विश्वस्तरीय विदेशी विश्वविद्यालयों के प्रवेश जैसे प्रावधानों का भी स्वागत किया है। सरकार का मानना है कि ये कदम भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली को और अधिक मजबूत तथा वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
केंद्र के साथ मिलकर करेगा काम बिहार
प्रो. एनके अग्रवाल ने कहा कि बिहार सरकार 'विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025' का पूर्ण समर्थन करती है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार के साथ समन्वय बनाकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिलता रहेगा।
शुक्रवार को भी जारी रहेगी चर्चा
विधेयक को लेकर संयुक्त संसदीय समिति की चर्चा और रायशुमारी का कार्यक्रम शुक्रवार को भी जारी रहेगा, जिसमें विभिन्न पक्षों और सुझावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।