नई दिल्ली: देश के पूर्वोत्तर राज्यों में दक्षिण-पश्चिम मानसून पूरी तरह सक्रिय हो गया है। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण कई इलाकों में जनजीवन प्रभावित होने लगा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 जुलाई तक पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में तेज बारिश का सिलसिला जारी रहेगा, जिससे बाढ़, जलभराव और भूस्खलन जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।
IMD के ताजा मौसम बुलेटिन के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक लगातार बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया गया है।
मौसम विभाग के अनुसार 29 जून की सुबह 8:30 बजे तक पिछले 24 घंटों के दौरान मेघालय के अधिकांश क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जबकि कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार आ रही नमी और सक्रिय मानसूनी ट्रफ के कारण पूर्वोत्तर भारत में वर्षा की तीव्रता बनी हुई है। यही वजह है कि मेघालय, असम और अरुणाचल प्रदेश के कई जिलों में लगातार तेज बारिश हो रही है।
भारतीय मौसम विभाग ने जिन राज्यों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है, उनमें शामिल हैं—
अरुणाचल प्रदेश
असम
मेघालय
नागालैंड
मणिपुर
मिजोरम
त्रिपुरा
इसके अलावा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी अगले पांच दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग का कहना है कि कुछ इलाकों में 7 से 20 सेंटीमीटर तक वर्षा हो सकती है, जबकि अलग-अलग स्थानों पर अत्यधिक भारी वर्षा (Extremely Heavy Rainfall) भी दर्ज होने की संभावना है।
पूर्वोत्तर भारत का बड़ा हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण लगातार बारिश के दौरान भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
विशेष रूप से अरुणाचल प्रदेश और मेघालय के कई संवेदनशील इलाकों में भूस्खलन और फ्लैश फ्लड का खतरा बना हुआ है। लगातार वर्षा के कारण कई नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है।
हाल के दिनों में कुछ क्षेत्रों में सड़क संपर्क भी प्रभावित हुआ है और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

भारी बारिश की चेतावनी के बाद संबंधित राज्य सरकारों और जिला प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
आपदा प्रबंधन विभाग, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राहत दलों को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ टीमें तैनात की गई हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
भारतीय मौसम विभाग ने नागरिकों से मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर लगातार नजर रखने की अपील की है।
भारी बारिश के दौरान लोगों को—
पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने,
नदी, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने,
बिजली गिरने के दौरान खुले स्थानों में न रुकने,
स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने
की सलाह दी गई है।
इसके अलावा मछुआरों को भी खराब मौसम के दौरान समुद्र और बड़ी नदियों में नहीं जाने की चेतावनी दी गई है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून अब धीरे-धीरे देश के अन्य हिस्सों में भी सक्रिय हो रहा है। आने वाले दिनों में पूर्वी भारत, मध्य भारत, पश्चिमी तट और उत्तर भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।