उत्तर प्रदेश के प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में शामिल लाला लाजपत राय स्मारक (LLRM) मेडिकल कॉलेज का करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक पहली ही तेज बारिश में जलभराव का शिकार हो गया। भवन परिसर में पानी भरने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद निर्माण गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक कॉलेज प्रशासन की ओर से जलभराव के कारणों पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
पहली ही बारिश में परिसर बना तालाब
बारिश के बाद सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक के प्रवेश मार्ग और आसपास के हिस्सों में पानी भर गया। वायरल वीडियो में परिसर के कई हिस्सों में जलभराव दिखाई दे रहा है, जिससे मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल कर्मचारियों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जिस भवन को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बताया गया था, वह पहली ही बारिश की परीक्षा में क्यों नहीं टिक पाया।
150 करोड़ की परियोजना पर उठे सवाल
सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक का निर्माण अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। ऐसे भवनों में प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम, वर्षा जल निकासी और आपदा-रोधी आधारभूत संरचना को प्राथमिकता दी जाती है। जलभराव की घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और परियोजना की तकनीकी निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि जलभराव का कारण निर्माण संबंधी कमी थी या असामान्य वर्षा और स्थानीय ड्रेनेज नेटवर्क की समस्या। इस संबंध में आधिकारिक जांच की प्रतीक्षा है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान
1966 में स्थापित LLRM मेडिकल कॉलेज पश्चिमी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख सरकारी मेडिकल कॉलेज है। यह कॉलेज और इससे संबद्ध अस्पताल मेरठ सहित आसपास के कई जिलों के लाखों मरीजों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। संस्थान में सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विस्तार के लिए आधुनिक ब्लॉक विकसित किया गया था।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
सिविल इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी अस्पताल परिसर में वर्षा जल निकासी प्रणाली (Storm Water Drainage System) का प्रभावी होना बेहद आवश्यक होता है। यदि पानी लंबे समय तक भवन परिसर में जमा रहता है तो इससे न केवल मरीजों की आवाजाही प्रभावित होती है, बल्कि भवन की दीर्घकालिक संरचनात्मक गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि किसी तकनीकी कमी की पुष्टि केवल आधिकारिक निरीक्षण और जांच रिपोर्ट के बाद ही की जा सकती है।
जांच और सुधार की मांग तेज
जलभराव की तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, निर्माण गुणवत्ता का तकनीकी ऑडिट कराने और जल निकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की सार्वजनिक परियोजनाओं में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।