मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के डॉक्टरों ने एक बेहद जटिल सर्जरी कर 11 वर्षीय बच्ची की आंख की रोशनी बचाने में सफलता हासिल की है। बच्ची की दाहिनी आंख के पीछे मौजूद आईबॉल (नेत्रगोलक) के आकार के ऑर्बिटल ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज नहीं होता तो बच्ची की आंख की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती थी और गंभीर न्यूरोलॉजिकल जटिलताएं भी हो सकती थीं।
तीन महीने से बाहर की ओर उभर रही थी आंख
बुलंदशहर निवासी 11 वर्षीय पूर्वी मावी की दाहिनी आंख पिछले करीब तीन महीनों से धीरे-धीरे बाहर की ओर उभर रही थी। शुरुआत में आंख की गतिविधियां सामान्य थीं, लेकिन समय के साथ उसकी दृष्टि कमजोर होने लगी। लगातार बढ़ती सूजन के बाद परिजन उसे मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा लेकर पहुंचे।
जांच में सामने आया बड़ा ट्यूमर
एमआरआई और अन्य जांचों में पता चला कि बच्ची की दाहिनी आंख की ऑर्बिट (नेत्र कक्ष) में 2.7 × 2.1 × 1.9 सेंटीमीटर का ट्यूमर मौजूद था, जिसका आकार लगभग एक आईबॉल जितना था। ट्यूमर की वजह से आंख, आंसू ग्रंथि और आंख की मांसपेशियां अपनी सामान्य स्थिति से हट गई थीं, जिससे आंख बाहर की ओर उभर आई थी। राहत की बात यह रही कि ट्यूमर मस्तिष्क तक नहीं फैला था।
चुनौतीपूर्ण थी सर्जरी
ट्यूमर आंख की रोशनी और उसकी गतिविधियों को नियंत्रित करने वाली महत्वपूर्ण नसों के बेहद करीब स्थित था। ऐसे में ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। डॉक्टरों की टीम ने मॉडिफाइड फ्रंटो-टेम्पोरो-ऑर्बिटो-जाइगोमैटिक (FTOZ) क्रेनियोटॉमी तकनीक का इस्तेमाल कर सुरक्षित तरीके से ट्यूमर को पूरी तरह निकाल दिया।
इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व डॉ. रोहित कुमार पांडे, सीनियर कंसल्टेंट (न्यूरोसर्जरी), मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा ने न्यूरोसर्जन, एनेस्थेटिस्ट और इंटेंसिविस्ट की बहु-विषयक टीम के साथ किया।
समय पर इलाज से बची आंख की रोशनी
डॉ. रोहित कुमार पांडे ने बताया कि आंख के भीतर गहराई में स्थित ट्यूमर का ऑपरेशन न्यूरोसर्जरी की सबसे चुनौतीपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक होता है। उनका उद्देश्य ट्यूमर को पूरी तरह निकालने के साथ-साथ बच्ची की दृष्टि और न्यूरोलॉजिकल कार्यक्षमता को सुरक्षित रखना था, जिसमें टीम को सफलता मिली।
उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी बच्चे की एक आंख लगातार बाहर की ओर उभर रही हो, आंखों के आसपास सूजन बनी रहे या बिना किसी स्पष्ट कारण के दृष्टि कमजोर होने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें। ऐसे लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकते हैं।
छह दिन बाद अस्पताल से मिली छुट्टी
सर्जरी के बाद बच्ची की रिकवरी तेजी से हुई। ऑपरेशन के छह दिन बाद उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार यह सफल सर्जरी एडवांस्ड न्यूरो-ऑन्कोलॉजी, स्कल-बेस सर्जरी और पीडियाट्रिक न्यूरोसर्जरी के क्षेत्र में अस्पताल की विशेषज्ञता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। साथ ही यह मामला बच्चों में गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और बहु-विषयक चिकित्सा टीम की अहम भूमिका को भी रेखांकित करता है।