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अहमदाबाद के स्कूल में शिक्षक की पिटाई से 10वीं के छात्र का फटा कान का पर्दा, सुनने की क्षमता पर खतरा; आरोपी शिक्षक निलंबित

प्रकाशित: 30-06-2026 10:12 AM
अहमदाबाद के स्कूल में शिक्षक की पिटाई से 10वीं के छात्र का फटा कान का पर्दा, सुनने की क्षमता पर खतरा; आरोपी शिक्षक निलंबित
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पीटी पीरियड के दौरान कथित थप्पड़ से घायल हुआ छात्र, डॉक्टरों ने सर्जरी की आशंका जताई; पुलिस और शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच

अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा और शारीरिक दंड (Corporal Punishment) को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर के निकोल इलाके स्थित एक निजी स्कूल में कथित तौर पर शिक्षक द्वारा 10वीं कक्षा के छात्र को जोरदार थप्पड़ मारने से उसके बाएं कान का पर्दा (ईयरड्रम) फट गया। घटना के बाद छात्र को सुनने में परेशानी होने लगी और मेडिकल जांच में गंभीर चोट की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि यदि सूजन समय पर कम नहीं हुई तो छात्र को सर्जरी करानी पड़ सकती है।

घटना सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन ने आरोपी शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग ने भी पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

पीटी पीरियड के दौरान हुई घटना

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घटना शनिवार को स्कूल परिसर में पीटी (फिजिकल ट्रेनिंग) पीरियड के दौरान हुई। पीड़ित छात्र, जो गुजराती माध्यम से कक्षा 10 में पढ़ता है, अपने कुछ सहपाठियों के साथ मैदान में बैठा हुआ था।

इसी दौरान अंग्रेजी माध्यम से जुड़े एक शिक्षक वहां पहुंचे। आरोप है कि किसी मामूली बात पर शिक्षक ने छात्र को जोरदार थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना तेज था कि छात्र के बाएं कान में गंभीर चोट लग गई। कुछ ही देर बाद उसके कान से खून निकलने लगा और उसे सुनने में कठिनाई महसूस होने लगी।

घटना के बाद स्कूल में हड़कंप मच गया और छात्र को तुरंत प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई गई।

अस्पताल में हुआ मेडिकल परीक्षण

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स्कूल प्रशासन ने छात्र के परिजनों को घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही छात्र के पिता स्कूल पहुंचे और बेटे को अस्पताल ले गए।

डॉक्टरों द्वारा की गई जांच में पता चला कि छात्र के बाएं कान का पर्दा फट चुका है। चिकित्सकों ने फिलहाल दवाइयों के माध्यम से उपचार शुरू किया है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में सूजन कम नहीं होती है तो सर्जरी करनी पड़ सकती है।

चिकित्सकों ने छात्र की सुनने की क्षमता पर भी लगातार निगरानी रखने की सलाह दी है।

परिवार ने जताया गुस्सा

घटना के बाद छात्र के पिता ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्कूल बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के लिए होते हैं, न कि उनके साथ हिंसा करने के लिए।

परिवार का कहना है कि यदि इस घटना के कारण छात्र की सुनने की क्षमता स्थायी रूप से प्रभावित होती है या ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित शिक्षक और स्कूल प्रबंधन की होगी।

उन्होंने कृष्णानगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए दोषी शिक्षक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने शुरू की जांच

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मामले की गंभीरता को देखते हुए कृष्णा

नगर पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल गैर-संज्ञेय (NC) शिकायत दर्ज की गई है और घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जांच की जा रही है। पुलिस स्कूल प्रशासन, आरोपी शिक्षक, प्रत्यक्षदर्शी छात्रों और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज कर रही है।

जांच रिपोर्ट और मेडिकल दस्तावेजों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग ने लिया संज्ञान

घटना सामने आने के बाद अहमदाबाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने भी मामले का संज्ञान लिया।

प्राथमिक जांच में छात्र को थप्पड़ मारने की पुष्टि होने के बाद संबंधित शिक्षक को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए। स्कूल प्रबंधन ने भी जांच पूरी होने तक शिक्षक को सस्पेंड कर दिया है।

शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और यह भी जांच की जा रही है कि स्कूल में छात्रों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

क्या शिक्षक ने गलती स्वीकार की?

कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि आरोपी शिक्षक ने स्कूल ट्रस्ट और छात्र के परिवार के सामने अपनी गलती स्वीकार की है।

हालांकि, छात्र के परिजनों का कहना है कि केवल माफी मांग लेने से मामला समाप्त नहीं हो सकता। उनका मानना है कि यदि छात्र को भविष्य में किसी प्रकार की स्थायी शारीरिक क्षति होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

स्कूलों में शारीरिक दंड पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में शारीरिक दंड को लेकर बहस छेड़ दी है।

भारत में शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत स्कूलों में छात्रों को शारीरिक दंड देना प्रतिबंधित है। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भी स्पष्ट रूप से कह चुका है कि किसी भी छात्र के साथ शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और सकारात्मक शिक्षण पद्धति अपनाई जानी चाहिए। ऐसे मामलों में केवल संबंधित शिक्षक ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

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