नोखा नगर परिषद की बोर्ड बैठक शनिवार को प्राइवेट जूनियर इंजीनियर (जेई) की नियुक्ति और सेवा विस्तार के मुद्दे पर हंगामेदार रही। वार्ड पार्षदों ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए संबंधित अभिलेख सदन में प्रस्तुत करने की मांग की।
प्राइवेट जेई की नियुक्ति पर पार्षदों ने उठाए सवाल
बैठक के दौरान वार्ड पार्षदों ने पूछा कि जब विभाग में सरकारी जूनियर इंजीनियर उपलब्ध हैं, तो प्राइवेट जेई से विभागीय और विकास कार्य किस आधार पर कराए जा रहे हैं। उन्होंने सेवा विस्तार से जुड़े आदेश की प्रति भी सदन में पेश करने की मांग की।
सेवा विस्तार के दस्तावेज नहीं होने पर बढ़ा विवाद
वार्ड पार्षद प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि अधिकारियों के अनुसार प्राइवेट जेई की नियुक्ति वर्ष 2018 में तीन माह के लिए हुई थी, जिसके बाद लगातार सेवा विस्तार दिया जाता रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि सेवा विस्तार किस आदेश के तहत दिया गया। बैठक के दौरान संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने पर कई पार्षदों ने आपत्ति जताई।
सरकारी जेई के रहते प्राइवेट जेई से काम कराने पर आपत्ति
पार्षदों ने आरोप लगाया कि सरकारी जेई की मौजूदगी के बावजूद प्राइवेट जेई से तकनीकी निरीक्षण, मापी और अन्य विभागीय कार्य कराए गए। उनका कहना था कि इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।
विधायक ने यात्री शेड खरीद प्रक्रिया पर भी मांगा जवाब
बैठक में मौजूद स्थानीय विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी ने नगर परिषद द्वारा लगाए गए यात्री शेड की खरीद प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या खरीद के लिए क्रय समिति का गठन किया गया था और इस पर कुल कितना खर्च हुआ। कार्यपालक अधिकारी ने बताया कि खरीद जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से की गई है और संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए जाएंगे।
सफाई, पेयजल और विकास कार्यों पर भी हुई चर्चा
बैठक में वार्ड पार्षदों ने योजनाओं के चयन में पारदर्शिता, सफाई व्यवस्था, नल-जल योजना और अन्य विकास कार्यों को लेकर भी अधिकारियों से जवाब मांगा। वार्ड पार्षद शिवकुमार चौरसिया ने पेयजल संकट का मुद्दा उठाया, जबकि मनोज कुमार ने सफाई व्यवस्था पर नाराजगी जताई।
हंगामे के बीच बैठक हुई संपन्न
बैठक के दौरान कई बार तीखी नोकझोंक की स्थिति बनी, जिसे सभापति राधेश्याम सिंह और उपसभापति धनजीत सिंह के हस्तक्षेप के बाद शांत कराया गया। जनप्रतिनिधियों ने मांग की कि नगर परिषद की सभी योजनाओं, नियुक्तियों और खर्च से जुड़े अभिलेख सार्वजनिक किए जाएं, ताकि विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।