गंगा नदी के बढ़ते कटाव को लेकर बिहार सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। पथ निर्माण मंत्री इंजीनियर कुमार शैलेन्द्र ने कटाव प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों को दो दिन के भीतर जमीन पर परिणाम दिखाने के निर्देश दिए।
राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध को हुआ भारी नुकसान
जानकारी के अनुसार, हाल ही में गंगा के तेज कटाव से राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का लगभग 150 मीटर हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। तटबंध को हुए नुकसान के बाद आसपास के गांवों में चिंता का माहौल है। जल संसाधन विभाग मरम्मत और सुरक्षा कार्य में जुटा हुआ है।
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने जताई नाराजगी
कटाव स्थल का निरीक्षण करते हुए मंत्री ने जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता और अन्य अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने कार्य की गति और गुणवत्ता पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
'दो दिन में परिणाम दिखाइए, नहीं तो कार्रवाई होगी'
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कटाव रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में जियो बैग, बोल्डर और अन्य आवश्यक संसाधनों का तत्काल उपयोग किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि दो दिनों के भीतर कार्य का प्रभाव दिखाई देना चाहिए, अन्यथा जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
24 घंटे निगरानी और त्वरित कार्रवाई के निर्देश
मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक समस्या आती है तो वे सीधे उनसे संपर्क करें। उन्होंने अपना मोबाइल नंबर साझा करते हुए कहा कि आवश्यकता पड़ने पर रात में भी संपर्क किया जा सकता है, लेकिन कार्य किसी भी हाल में नहीं रुकना चाहिए। साथ ही तटबंध की चौबीसों घंटे निगरानी रखने के निर्देश भी दिए।
स्थानीय लोगों को दिलाया भरोसा
निरीक्षण के बाद मंत्री ने कहा कि गंगा की धारा फिलहाल तटबंध की ओर मुड़ गई है, जिससे चुनौती बढ़ी है। हालांकि उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और तटबंध की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
26 जुलाई को हुआ था तटबंध का कटाव
गौरतलब है कि 26 जुलाई की रात गंगा के तेज बहाव के कारण राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से जल संसाधन विभाग जियो बैग, बोल्डर और अन्य तकनीकी उपायों के माध्यम से कटाव रोकने और तटबंध को सुरक्षित करने का कार्य लगातार कर रहा है।