गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। धर्मनगरी अयोध्या में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। भोर होते ही हजारों श्रद्धालु पवित्र सरयू नदी में स्नान और दान-पुण्य के लिए पहुंच गए।
भोर से शुरू हुआ सरयू स्नान और दान-पुण्य
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं ने ब्रह्ममुहूर्त से ही सरयू नदी में आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य किया। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
आश्रमों और मठों में हुआ गुरु पूजन
अयोध्या के विभिन्न आश्रमों, मठों और मंदिरों में शिष्यों ने अपने गुरुजनों के चरण पखारकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं ने गुरु को पुष्प, फल, वस्त्र और दक्षिणा अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
भजन-कीर्तन और सत्संग से गूंजे मंदिर
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मंदिरों और आश्रमों में भजन-कीर्तन, सत्संग, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इन कार्यक्रमों में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया।
सनातन परंपरा में गुरु का विशेष महत्व
सनातन परंपरा में गुरु को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला मार्गदर्शक और ईश्वर तक पहुंचने का माध्यम माना गया है। गुरु के मार्गदर्शन को जीवन में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
महर्षि वेदव्यास जयंती के रूप में भी मनाई जाती है गुरु पूर्णिमा
गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु के बताए मार्ग पर चलने, सदाचार अपनाने और समाज में सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।