एक ओर देश डिजिटल इंडिया और विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने का दावा कर रहा है, वहीं उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले का एक गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। हालात ऐसे हैं कि बीमारों तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती और उन्हें चारपाई पर उठाकर करीब एक किलोमीटर तक कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते से मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
79 साल बाद भी गांव तक नहीं पहुंची पक्की सड़क
यह तस्वीरें सीतापुर जिले के मिश्रिख ब्लॉक की टेडवा ग्राम पंचायत के भिम्मापुरवा गांव की हैं। आजादी के करीब आठ दशक बाद भी गांव तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के मौसम में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है।
मरीजों को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में किसी के बीमार होने पर एंबुलेंस कच्चे रास्ते के कारण गांव तक नहीं पहुंच पाती। ऐसे में मरीजों को चारपाई पर लिटाकर लगभग एक किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। इस वजह से कई बार समय पर इलाज नहीं मिल पाता, जिससे मरीज की जान भी खतरे में पड़ जाती है।
बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा गहरा असर
सड़क न होने का सबसे अधिक असर गांव के बच्चों की शिक्षा पर पड़ रहा है। बारिश के दिनों में रास्ते पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं, जिससे बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते। नतीजतन कई बच्चों की पढ़ाई छूट चुकी है और गांव में शिक्षा का स्तर लगातार प्रभावित हो रहा है।
सुविधाओं के अभाव में पलायन को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में कई परिवार गांव छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में बसने को मजबूर हो गए हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द सड़क का निर्माण नहीं हुआ तो आने वाले समय में और भी लोग पलायन करेंगे।
वर्षों से मिल रहा सिर्फ आश्वासन
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से सड़क निर्माण की मांग की, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। वर्षों बीत जाने के बावजूद गांव की तस्वीर नहीं बदली और विकास के दावे यहां तक नहीं पहुंच सके।
ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आई हकीकत
भिम्मापुरवा गांव की जमीनी हकीकत सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित यह गांव आज भी विकास की राह देख रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर भिम्मापुरवा के लोगों को बुनियादी सुविधाएं कब मिलेंगी और सरकारी योजनाओं का लाभ इस गांव तक कब पहुंचेगा?