मानसून की पहली तेज बारिश ने श्रावस्ती जिले की इकौना नगर पंचायत में विकास और तैयारियों के दावों की पोल खोल दी। कुछ घंटों की बारिश के बाद ही मुख्य सड़कें, गलियां और कई रिहायशी इलाके जलमग्न हो गए। जलभराव के कारण लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया, जबकि राहगीरों, स्कूली बच्चों और दुकानदारों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सड़कें और मोहल्ले बने तालाब
बारिश के बाद नगर पंचायत के कई इलाकों में पानी भर गया। मुख्य मार्गों से लेकर आवासीय गलियों तक जलभराव होने से यातायात प्रभावित रहा। कई स्थानों पर लोगों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ा, जिससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया।
घंटों तक नहीं हुई जलनिकासी
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश थमने के कई घंटे बाद भी सड़कों पर पानी जमा रहा। जलनिकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाई का सामना करना पड़ा और बाजारों में भी सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं।
नालों की सफाई पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि मानसून से पहले नालों की सफाई के दावे केवल कागजों तक सीमित रहे। उनका कहना है कि समय पर प्रभावी सफाई और ड्रेनेज व्यवस्था की जाती तो पहली ही बारिश में नगर को जलभराव की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
घरों तक पहुंचा गंदा पानी, बीमारी का बढ़ा खतरा
जलभराव के चलते कई इलाकों में गंदा पानी घरों तक पहुंच गया। लोगों का कहना है कि इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित व संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नागरिकों ने स्वास्थ्य विभाग और नगर पंचायत से तत्काल सफाई और फॉगिंग अभियान चलाने की भी मांग की है।
नगर पंचायत और प्रशासन से कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने नगर पंचायत और जिला प्रशासन से जलनिकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने, नालों की प्रभावी सफाई कराने और जलभराव वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की मांग की है।
मानसून की शुरुआत में ही तैयारियों पर सवाल
मानसून की पहली ही बारिश में इकौना नगर पंचायत की स्थिति बिगड़ने से प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शुरुआती बारिश में ही यह हाल है, तो पूरे मानसून के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो सकते हैं। प्रशासन से समय रहते प्रभावी कदम उठाने की मांग लगातार तेज होती जा रही है।