बरेली के जिला अधिकारी कार्यालय के बाहर गुरुवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति अपनी पत्नी और 8 वर्षीय बेटी के साथ आत्मदाह करने पहुंच गया। परिवार ने अपने ऊपर ज्वलनशील पदार्थ डाल लिया, लेकिन मौके पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया।
एलआईयू, इंटेलिजेंस और होमगार्ड की सूझबूझ से बची तीनों की जान
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जैसे ही व्यक्ति ने अपने ऊपर पेट्रोल डालना शुरू किया, मौके पर तैनात इंटेलिजेंस के ओमपाल सिंह, एलआईयू के अमित कुमार और होमगार्ड संदीप मिश्रा तुरंत उसकी ओर दौड़े। तीनों ने बिना देर किए परिवार को काबू में लिया और आग लगाने से रोक दिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ सेकंड की भी देरी होती तो कलेक्ट्रेट परिसर में बड़ा हादसा हो सकता था।
मीरगंज के खमरिया साहनी गांव का रहने वाला है परिवार
जानकारी के अनुसार, आत्मदाह का प्रयास करने वाला व्यक्ति 47 वर्षीय लालसिंह गंगवार है, जो थाना मीरगंज क्षेत्र के गांव खमरिया साहनी का निवासी है। वह अपनी 46 वर्षीय पत्नी राजरानी और 8 वर्षीय बेटी नंदनी के साथ डीएम कार्यालय पहुंचा था। परिवार ने प्रशासन से न्याय न मिलने का आरोप लगाते हुए आत्मदाह का प्रयास किया।
सरकारी रास्ते को लेकर चल रहा है विवाद
पूरा मामला मीरगंज तहसील के ग्राम खमरिया साहनी में सरकारी खड़ंजा मार्ग को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। लालसिंह और सुंदरलाल का आरोप है कि गांव के चन्द्रपाल और होमगार्ड रामप्रकाश ने मंडनपुर रोड से जुड़ने वाले सरकारी रास्ते पर वाहन खड़े कर, पशु बांधकर और लकड़ियां रखकर आवागमन बाधित कर दिया है।राजस्व विभाग की स्थलीय जांच में मौके पर अस्थायी अतिक्रमण मिलने की बात सामने आई। हालांकि, दूसरे पक्ष का दावा है कि संबंधित भूमि वर्ष 1959 के बैनामे के आधार पर उनकी निजी संपत्ति है।
जांच में सामने आए अलग-अलग दावे
अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1986 में क्षेत्र में चकबंदी हो चुकी है, जिससे पुराने बैनामे की वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी। जांच के दौरान संबंधित पक्ष मौके पर भी उपस्थित नहीं हुआ। रिपोर्ट में गांव में तनाव की स्थिति का उल्लेख करते हुए पुलिस की मौजूदगी में समाधान की आवश्यकता बताई गई है।वहीं, राजस्व विभाग की दूसरी जांच में मामले को आबादी भूमि का विवाद बताया गया है। विभाग का कहना है कि राजस्व मानचित्र में संबंधित रास्ता दर्ज नहीं है और शिकायतकर्ता के पास वैकल्पिक निकास उपलब्ध है।
पहले भी हो चुका है विवाद का समाधान
प्रशासन के अनुसार, वर्ष 2023 में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराया गया था। इसके बाद वर्ष 2025 में रास्ते से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की गई थी। इसके बावजूद विवाद फिर से गहराने पर मामला जिला अधिकारी कार्यालय तक पहुंच गया और आत्मदाह की कोशिश जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई। फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटा है।