मानसून की पहली बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत दिलाई, वहीं शहर की बिजली व्यवस्था की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक खुले बिजली के तार, झुके हुए खंभे और नीचे लटकती विद्युत लाइनें लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान कई स्थानों पर बिजली के खंभों में करंट उतरने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है।
खुले तार और जर्जर खंभे बने चिंता का विषय
शहर के कई इलाकों में बिजली के तार खुले पड़े हैं, जबकि कई जगहों पर जर्जर खंभों के सहारे बिजली आपूर्ति की जा रही है। बरसात के मौसम में जलभराव और नमी के कारण इन स्थानों पर करंट फैलने का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति आम नागरिकों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए बेहद जोखिम भरी है।
स्थानीय लोगों ने जताई नाराजगी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से स्थायी समाधान नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि मानसून से पहले सुरक्षा व्यवस्था और बिजली लाइनों के रखरखाव के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अलग दिखाई देते हैं।
इस संबंध में स्थानीय निवासी शाह आलम और राजन ने भी बिजली व्यवस्था को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और विभाग से तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की।
लोगों ने की त्वरित कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने बिजली विभाग से मांग की है कि खुले तारों को तुरंत बदला जाए, जर्जर खंभों की मरम्मत कराई जाए और संवेदनशील क्षेत्रों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो बरसात के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
बड़ा सवाल—क्या हादसे के बाद ही होगी कार्रवाई?
मानसून की बारिश ने एक बार फिर बिजली व्यवस्था की चुनौतियों को सामने ला दिया है। अब सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग समय रहते इन खामियों को दूर करेगा या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही व्यवस्था में सुधार की पहल होगी।