एक चर्चित हत्या मामले की जांच में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस पूछताछ के दौरान आरोपी बेटी ने दावा किया कि उसकी योजना केवल अपनी मां को निशाना बनाने की थी और वह अपने भाई को किसी भी तरह की चोट नहीं पहुंचाना चाहती थी। आरोपी के इस बयान ने जांच को नई दिशा दी है।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह था कि यदि यह सड़क दुर्घटना थी, तो कार ने सामान्य दिशा छोड़कर दूसरी ओर जाकर टक्कर क्यों मारी। इसी असामान्य पैटर्न ने जांच अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा और बाद में पूरे मामले की परतें खुलने लगीं।

जांच अधिकारियों के मुताबिक, शुरुआती तौर पर घटना को सड़क हादसा माना जा रहा था। लेकिन घटनास्थल की जांच, सीसीटीवी फुटेज, वाहन की स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर कई ऐसे तथ्य सामने आए, जिन्होंने पुलिस को संदेह करने पर मजबूर कर दिया।
पुलिस का कहना है कि जिस दिशा में वाहन चल रहा था, उसके विपरीत जाकर टक्कर मारना सामान्य सड़क दुर्घटना जैसा नहीं लग रहा था। यही पहलू जांच का अहम आधार बना।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपी बेटी ने कथित तौर पर कहा कि उसका उद्देश्य अपने भाई को नुकसान पहुंचाना नहीं था। उसने दावा किया कि उसने पूरी योजना इस तरह बनाई थी कि भाई सुरक्षित रहे और केवल उसकी मां निशाने पर आए।
हालांकि, पुलिस इस बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने के लिए सभी तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांच एजेंसियां केवल आरोपी के बयान पर निर्भर नहीं हैं। पुलिस घटनास्थल से जुटाए गए सबूत, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल फोन रिकॉर्ड, वाहन की फोरेंसिक जांच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि मामले में अंतिम निष्कर्ष सभी उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निकाला जाएगा।
पुलिस ने मामले से जुड़े कई लोगों के बयान दर्ज किए हैं। परिवार के सदस्यों, परिचितों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि घटना से पहले किसी प्रकार का पारिवारिक विवाद, आर्थिक तनाव या अन्य कारण तो मौजूद नहीं थे।
जांच एजेंसियां संभावित मकसद (मोटिव) की भी विस्तार से पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामला अभी जांच के अधीन है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। आरोपी के कथित बयान का सत्यापन उपलब्ध साक्ष्यों से किया जाएगा।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह के निष्कर्ष पर न पहुंचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।