पहली बारिश में खुली जल निकासी व्यवस्था की पोल
गाजियाबाद जनपद में भारी बारिश के बाद शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। शहर की कई प्रमुख सड़कों पर जलभराव की स्थिति देखने को मिली, जिससे आम लोगों के साथ-साथ कारोबारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
मोहननगर और साहिबाबाद जैसे व्यस्त इलाकों में भी बारिश का पानी सड़कों पर जमा रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि समय रहते नालों और नालियों की सफाई नहीं होने के कारण जलभराव की समस्या पैदा हुई।
जलभराव से हादसे, दो लोगों की मौत से आक्रोश
बारिश के बाद हुए जलभराव ने कई गंभीर हादसों को जन्म दिया। विजयनगर के सर्वोदय नगर में पानी में डूबने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, वहीं करंट की चपेट में आने से एक सिक्योरिटी गार्ड की भी जान चली गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर नगर निगम की ओर से समय रहते जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाती और नालों की सफाई कराई जाती तो इन हादसों को टाला जा सकता था।
जिलाधिकारी ने लिया सड़कों का जायजा, अधिकारियों की गैरमौजूदगी पर सवाल
बारिश के बाद गाजियाबाद के जिलाधिकारी ने खुद सड़कों पर उतरकर हालात का जायजा लिया। वहीं स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि निरीक्षण के दौरान जीडीए वीसी और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नजर नहीं आए।
लोगों का आरोप है कि नगर आयुक्त के जलभराव से निपटने के दावों की पहली ही बारिश ने पोल खोल दी है।
कारोबारियों ने बताई परेशानी, बोले- व्यापार पर पड़ रहा असर
स्थानीय कारोबारी हर्ष जैन ने बताया कि जलभराव के कारण कारोबार पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क पर पानी भरने से आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है और कई बार वाहन भी पानी में फंस जाते हैं।
वहीं वीरेंद्र ने कहा कि अगर नालियों और नालों की नियमित सफाई होती रहती तो जलभराव जैसी समस्या सामने नहीं आती।
जनता का सवाल- जिम्मेदारी कौन लेगा?
स्थानीय निवासी विवेक यादव ने कहा कि जलभराव के कारण दो लोगों की जान चली गई। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर नगर निगम ने समय पर अपनी जिम्मेदारी निभाई होती तो दो परिवारों को अपने लोगों को नहीं खोना पड़ता।
गाजियाबाद में बारिश के बाद बने हालात ने एक बार फिर नगर निगम की तैयारियों और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।