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पहली बारिश में डूबा मथुरा, जलभराव ने खोली नगर निगम की तैयारियों की पोल

प्रकाशित: 08-07-2026, 11:07 AM
पहली बारिश में डूबा मथुरा, जलभराव ने खोली नगर निगम की तैयारियों की पोल
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धार्मिक नगरी मथुरा में कुछ घंटों की बारिश ने नगर निगम के दावों की हकीकत सामने ला दी। शहर के कई प्रमुख इलाकों में भारी जलभराव हो गया, जिससे आम लोगों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

शहर के कई प्रमुख इलाके जलभराव की चपेट में

नया बस अड्डा, भूतेश्वर पुल, होलीगेट, स्वामीघाट, सदर बाजार, महोली रोड, कृष्णा नगर और सौंख अड्डा समेत शहर के कई हिस्सों में सड़कें पानी से लबालब नजर आईं। जलभराव के कारण यातायात प्रभावित हुआ और लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया।

नगर निगम के दावों पर उठे सवाल

हर वर्ष मानसून से पहले नगर निगम नालों की सफाई और बेहतर जल निकासी व्यवस्था के दावे करता है। लेकिन पहली ही बारिश में शहर की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। इससे नगर निगम की तैयारियों और दावों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और व्यापारी सबसे ज्यादा प्रभावित

जलभराव के कारण स्कूल से लौट रहे बच्चों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। बुजुर्गों को भी पानी में संभलकर चलना पड़ा, जबकि कई बाजारों में गंदा पानी दुकानों के अंदर तक पहुंच गया। सड़क और नाले का अंतर समझ पाना भी कई जगह मुश्किल हो गया।

करोड़ों खर्च के बावजूद क्यों डूब गया शहर?

हर साल नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि तैयारियां पूरी थीं, तो पहली ही बारिश में शहर जलमग्न कैसे हो गया? क्या नालों की सफाई केवल कागजों तक सीमित रही या फिर योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां रहीं?

सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल

बारिश के बाद सोशल मीडिया पर भी नगर निगम की व्यवस्थाओं को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। कई यूजर्स ने व्यंग्य करते हुए लिखा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो अगली बार सड़कों पर वाहनों की जगह नाव चलानी पड़ेगी।

श्रद्धालुओं और पर्यटन पर भी पड़ा असर

मथुरा धार्मिक नगरी होने के कारण यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। जलभराव की समस्या का असर केवल स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक पर्यटन और शहर की व्यवस्थाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ा।

लोगों को अब ठोस समाधान का इंतजार

अब लोगों की निगाहें नगर निगम और संबंधित विभागों पर टिकी हैं। नागरिकों की मांग है कि जलभराव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए प्रभावी एवं स्थायी कार्ययोजना बनाई जाए। पहली ही बारिश ने शहर की तैयारियों की परीक्षा ले ली है और व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

 
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