28 वर्षीय आकृति की तीसरी मंजिल से गिरकर मौत के मामले में पुलिस मोबाइल डेटा, फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिजनों के आरोपों सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 28 वर्षीय नवविवाहिता आकृति की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। तीसरी मंजिल से गिरने के कारण हुई इस मौत की जांच दिल्ली पुलिस कई अलग-अलग पहलुओं से कर रही है। जांच के दौरान सामने आया है कि घटना से पहले आकृति ने अपने मोबाइल फोन पर ऊंचाई से गिरने पर मौत की संभावना से जुड़े कुछ सवाल इंटरनेट पर सर्च किए थे। हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि केवल इंटरनेट सर्च हिस्ट्री के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता और इसे जांच का केवल एक हिस्सा माना जा रहा है।
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पुलिस के अनुसार, आकृति की शादी करीब ढाई महीने पहले हुई थी। बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने अपने कार्यालय के सहकर्मियों के लिए शादी के उपलक्ष्य में एक पार्टी भी आयोजित की थी। ऐसे में अचानक हुई उनकी मौत ने परिवार, परिचितों और जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की जांच के तहत पुलिस ने मृतका का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, जिसमें इंटरनेट सर्च हिस्ट्री, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), चैट, मैसेज और अन्य डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को समझने के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मृतका के परिवार ने इस मामले में पति और ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद से ही आकृति को दहेज की मांग को लेकर मानसिक और घरेलू प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। परिवार ने आरोप लगाया है कि लगातार उत्पीड़न के कारण यह दुखद घटना हुई।
परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित कानूनी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और आरोपों की भी अलग से जांच की जा रही है।

दिल्ली पुलिस का कहना है कि जांच पूरी तरह वैज्ञानिक और निष्पक्ष तरीके से की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले सबूत, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, डिजिटल डेटा और परिवार के आरोप—सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंटरनेट सर्च हिस्ट्री किसी व्यक्ति की मानसिक स्थिति या घटना के कारण का अंतिम प्रमाण नहीं होती। इसलिए केवल इसी आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
फिलहाल जांच एजेंसियां तीन प्रमुख पहलुओं पर काम कर रही हैं—
क्या यह एक दुर्घटना थी?
क्या यह आत्महत्या का मामला है?
या फिर इसके पीछे किसी प्रकार का आपराधिक षड्यंत्र या उत्पीड़न था?
इन सभी संभावनाओं की जांच फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर की जा रही है।
फिलहाल इस मामले में अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। ऐसे में किसी भी प्रकार के अनुमान या अपुष्ट दावों से बचना आवश्यक है।
आधिकारिक जांच पूरी होने और सभी वैज्ञानिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही यह तय हो सकेगा कि आकृति की मौत हादसा थी, आत्महत्या थी या इसके पीछे कोई आपराधिक कारण था।