अयोध्या: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला को समर्पित करीब 5 करोड़ रुपये मूल्य की स्वर्णमंडित रामचरितमानस को लेकर हाल के दिनों में उठे विवाद पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। ट्रस्ट ने साफ कहा है कि यह पवित्र ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है और मंदिर की आभूषण कोठरी (ट्रेजरी) में संरक्षित रखा गया है। सोशल मीडिया और कुछ अन्य माध्यमों में इसके गायब होने की जो खबरें चल रही हैं, वे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

यह विवाद तब सामने आया जब देश के पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मीनारायणन ने दावा किया कि उनके परिवार की ओर से भगवान रामलला को भेंट की गई स्वर्णमंडित रामचरितमानस अब मंदिर में पहले की तरह दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार जानकारी मांगने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता व्यक्त की।
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की अटकलें और दावे सामने आने लगे, जिससे श्रद्धालुओं के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि स्वर्णमंडित रामचरितमानस मंदिर परिसर से कहीं नहीं गई है। इसे पूरी सुरक्षा के साथ मंदिर की ट्रेजरी में रखा गया है, जहां अन्य बहुमूल्य दान और धार्मिक धरोहरों को भी सुरक्षित रखा जाता है।
ट्रस्ट के अनुसार, मंदिर में प्राप्त हर मूल्यवान वस्तु को लगातार सार्वजनिक प्रदर्शन पर रखना संभव नहीं है। सुरक्षा कारणों और संरक्षण की दृष्टि से समय-समय पर इन वस्तुओं को सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।

ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि स्वर्णमंडित रामचरितमानस का पूरा विवरण मंदिर के आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज है। यदि दानदाता या उनके परिवार के सदस्य इसे देखना चाहते हैं, तो वे पूर्व सूचना देकर मंदिर प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।
ट्रस्ट का कहना है कि इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है और उसके संरक्षण में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है।
जानकारी के अनुसार, यह विशेष रामचरितमानस वर्ष 2024 में भगवान रामलला को समर्पित की गई थी। इसे विशेष शिल्पकला और आधुनिक तकनीक की मदद से तैयार किया गया है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं—
यह ग्रंथ धार्मिक, सांस्कृतिक और कलात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और संगठनात्मक सुधार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
हालांकि ट्रस्ट ने दोहराया कि स्वर्णमंडित रामचरितमानस को लेकर फैल रही अफवाहों में कोई सच्चाई नहीं है और श्रद्धालुओं से केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने की अपील की है।
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार, स्वर्णमंडित रामचरितमानस के चोरी होने या गायब होने की पुष्टि नहीं हुई है। ट्रस्ट का कहना है कि यह ग्रंथ पूरी तरह सुरक्षित है और मंदिर की ट्रेजरी में संरक्षित रखा गया है।
ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि दानदाता चाहें तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी मौजूदगी स्वयं देख सकते हैं।