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मेहनत, संघर्ष और सफलता की कहानी: सिनेमा से संसद तक कंगना रनौत का सफर

प्रकाशित: 05-07-2026 08:07 AM
मेहनत, संघर्ष और सफलता की कहानी: सिनेमा से संसद तक कंगना रनौत का सफर
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नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से कस्बे से निकलकर बॉलीवुड की सफल अभिनेत्रियों में अपनी पहचान बनाना और फिर राजनीति के मैदान में उतरकर सांसद बनना, कंगना रनौत की यात्रा भारतीय सिनेमा और सार्वजनिक जीवन की चर्चित कहानियों में शामिल है। राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित कंगना आज न केवल फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखती हैं, बल्कि लोकसभा सांसद के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास, विवाद और लगातार आगे बढ़ने की इच्छा का उदाहरण माना जाता है।

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कंगना रनौत का जन्म 23 मार्च 1987 को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले (तत्कालीन भाम्बला, वर्तमान सुरजपुर क्षेत्र) में हुआ। उनके परिवार की इच्छा थी कि वे डॉक्टर बनें, लेकिन बचपन से ही उनका रुझान अभिनय और कला की ओर था।

कम उम्र में ही उन्होंने घर छोड़कर दिल्ली और फिर मुंबई का रुख किया। शुरुआती दिनों में मॉडलिंग और थिएटर से जुड़ने के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। संघर्ष के दौर में उन्हें आर्थिक और पेशेवर दोनों तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।

'गैंगस्टर' से मिला बड़ा ब्रेक

Kangana Ranaut Pic/X, ANI

साल 2006 में निर्देशक अनुराग बसु की फिल्म 'गैंगस्टर' से कंगना ने बॉलीवुड में डेब्यू किया। पहली ही फिल्म में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री (Best Female Debut) का पुरस्कार मिला।

इसके बाद 'वो लम्हे', 'लाइफ इन ए... मेट्रो' और अन्य फिल्मों में उनके अभिनय ने उन्हें इंडस्ट्री की प्रतिभाशाली अभिनेत्रियों की सूची में शामिल कर दिया।

इन फिल्मों ने बदली कंगना की पहचान

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कंगना रनौत के करियर में कई ऐसी फिल्में रहीं जिन्होंने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

'फैशन' (2008) में उन्होंने एक संघर्षरत मॉडल का किरदार निभाया। इस फिल्म के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री) से सम्मानित किया गया।

'क्वीन' (2014) उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म में आत्मनिर्भर बनने वाली एक साधारण लड़की की कहानी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस भूमिका के लिए कंगना को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) मिला।

'तनु वेड्स मनु' और 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' में निभाए गए 'तनु' और 'कुसुम' के डबल रोल को आज भी उनके सर्वश्रेष्ठ अभिनय में गिना जाता है। वहीं 'मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी' (2019) में उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी निभाई और रानी लक्ष्मीबाई के किरदार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने का प्रयास किया।

आज कंगना उन चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्हें चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।

बेबाक बयान और विवादों से भी रही चर्चा

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कंगना रनौत अपने अभिनय के साथ-साथ बेबाक बयानों के लिए भी अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। उन्होंने कई मौकों पर बॉलीवुड में नेपोटिज्म, कार्य संस्कृति और फिल्म इंडस्ट्री में बाहरी कलाकारों के संघर्ष जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी।

उनके कई बयान राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय भी बने। हालांकि समर्थकों का कहना है कि कंगना हमेशा अपनी बात बिना झिझक रखती हैं, जबकि आलोचक कई बार उनके बयानों को विवादित बताते रहे हैं।

राजनीति में नई पारी

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लोकसभा चुनाव 2024 में भारतीय जनता पार्टी ने कंगना रनौत को हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय विकास, पर्यटन, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।

चुनाव परिणाम में उन्होंने जीत दर्ज की और पहली बार लोकसभा पहुंचीं। सांसद बनने के बाद कंगना ने कहा कि फिल्मों और राजनीति दोनों का उद्देश्य समाज से जुड़ना है और वे दोनों क्षेत्रों में अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहती हैं।

मेहनत को मानती हैं सफलता की कुंजी

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कंगना रनौत कई इंटरव्यू में यह कह चुकी हैं कि वह सफलता को किस्मत नहीं बल्कि मेहनत का परिणाम मानती हैं। विभिन्न फिल्मों के लिए उन्होंने लंबे समय तक तैयारी की।

'मणिकर्णिका' के लिए उन्होंने घुड़सवारी और तलवारबाजी का प्रशिक्षण लिया, जबकि 'क्वीन' जैसे किरदार के लिए उन्होंने अपने अभिनय और व्यक्तित्व पर विशेष मेहनत की। उनका मानना है कि किसी भी कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका अनुशासन और लगातार सीखने की इच्छा होती है।

सांसद के रूप में प्राथमिकताएं

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सांसद बनने के बाद कंगना रनौत ने हिमाचल प्रदेश में पर्यटन, सड़क संपर्क, महिला सशक्तिकरण और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने जैसे मुद्दों पर काम करने की बात कही है।

वहीं फिल्म जगत में भी उन्होंने संकेत दिए हैं कि भविष्य में वे ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनना चाहेंगी जो भारतीय संस्कृति, इतिहास और सामाजिक विषयों से जुड़ी हों।

 

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