अयोध्या: रामनगरी अयोध्या से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ महंत संतराम दास महाराज का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे संत समाज और लाखों श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने शनिवार सुबह अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।
महंत संतराम दास महाराज हनुमानगढ़ी की प्रतिष्ठित संत परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति, धर्म प्रचार, आध्यात्मिक साधना तथा समाज सेवा के लिए समर्पित किया। उनके सान्निध्य में अनेक संतों, भक्तों और युवाओं ने आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त किया। उनकी सरल जीवनशैली, अनुशासन और संत परंपराओं के प्रति समर्पण के कारण उन्हें संत समाज में विशेष सम्मान प्राप्त था।

अयोध्या स्थित सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां की संत परंपरा का सनातन धर्म में विशेष स्थान माना जाता है। महंत संतराम दास महाराज लंबे समय से इस परंपरा से जुड़े रहे और उन्होंने धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके प्रवचनों में धर्म के साथ मानव सेवा, सदाचार और सामाजिक समरसता का संदेश प्रमुख रूप से देखने को मिलता था। यही कारण था कि दूर-दराज़ से श्रद्धालु उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए अयोध्या पहुंचते थे।
महंत संतराम दास महाराज को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निकट संतों में भी माना जाता था। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों की कई बार मुलाकातें हुईं। संत समाज के विभिन्न मुद्दों पर भी उनकी राय को गंभीरता से लिया जाता था।
हनुमानगढ़ी के प्रसिद्ध संत राजू दास भी उनके शिष्य माने जाते हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में संत, महंत, श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक उनके आश्रम पहुंचे और अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

धार्मिक परंपराओं के अनुसार महंत संतराम दास महाराज का अंतिम संस्कार अयोध्या के पावन सरयू तट पर किए जाने की तैयारी की गई है। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में संत समाज, अखाड़ों के प्रतिनिधि, स्थानीय लोग और श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
प्रशासन की ओर से भी अंतिम संस्कार के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित किए जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
महंत संतराम दास महाराज के निधन पर विभिन्न धार्मिक संगठनों और संतों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। संत समाज का कहना है कि उनका जाना केवल हनुमानगढ़ी ही नहीं, बल्कि पूरे सनातन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने हमेशा धर्म के साथ सेवा और संस्कारों को प्राथमिकता दी। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने कभी भी पद और प्रतिष्ठा को महत्व नहीं दिया, बल्कि सादगी और तपस्या को अपने जीवन का आधार बनाया।

महंत संतराम दास महाराज का पूरा जीवन त्याग, तपस्या और मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का लगातार प्रयास किया। उनके विचारों और शिक्षाओं का प्रभाव हजारों श्रद्धालुओं के जीवन पर आज भी स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
उनके निधन के साथ संत समाज ने एक ऐसे आध्यात्मिक मार्गदर्शक को खो दिया है, जिन्होंने दशकों तक श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और सदाचार का मार्ग दिखाया। उनके अनुयायियों का मानना है कि उनके विचार और शिक्षाएं हमेशा जीवित रहेंगी।
महंत संतराम दास महाराज के निधन से अयोध्या की धार्मिक परंपरा को गहरा आघात पहुंचा है। संत समाज और श्रद्धालु उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से उनकी पवित्र आत्मा की शांति की प्रार्थना कर रहे हैं।
ॐ शांति।